नबंबर १९७७ को विदिशा शहर में जन्मी वहीं से अपनी शिक्षा केमिस्ट्री में पूरी की पिछले नौ सालों से सिंगापुर में अपने परिवार के साथ सुखद जीवन व्यतीत कर र ही हूँ यहाँ एक अंतरराष्टीय विद्यालय में हिन्दी भाषा को भारतीय और विदेशी लोगों तक पहुँचाते गर्व अनुभव करती हूँ।

कभी सोचा नही था कि इस तरह शब्द मेरे कलम से लय में निकलते चले जाएँगे तकरीबन तीन साल पहिले एक छोटी सी कविता में अपने मन के भाव को लिए अंतरजाल पर चली आई
यहाँ सभी के प्यार और उत्साह वर्धन से लिखने का सिलसिला चल पड़ा


आज साहित्या शिल्पी को अपनी रचना के साथ अपनी शुभकामनाएँ साहित्य शिल्पी की पूरी टीम को देना चाहती हूँ जिन्होनें इतने अच्छे काम का बीड़ा उठाया है


आप बस चलते रहे कारवाँ खुद बा खुद जुड़ जाएगा

श्रद्धा जैन

shrddha8@gmail.com



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नाम : डा॰ विश्वास कुमार शर्मा
कवि नाम : डा॰ कुमार विश्वास
पिता का नाम : डा॰ चन्द्रपाल शर्मा
जन्म तिथि : दस फ़रवरी उन्नीस सौ सत्तर
जन्म स्थान : धौलाना (ज़िला-गाज़ियाबाद)
शैक्षणिक योग्यता : एम॰ए॰, पी॰एच॰डी॰, डी॰लिट्॰ (पंजी)
शोध विषय : कौरवी लोकगीतों में अभिव्यक्त लोकचेतना का तुलनात्मक अध्ययन
सम्प्रति : गत चौदह वर्षों से विश्वविद्यालय सेवा में स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं का अध्यापन।

शैक्षणिक उपलब्धियां:
1) स्नातकोत्तर परीक्षा में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान (Gold Medalist)
2) भारत सरकार के शिक्षा मन्त्रालय द्वारा स्नातक परीक्षा के आधार पर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति प्राप्त
3) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रदत्त, “लघु शोध अध्येतावृत्ति (Minor Research Project) के अंतर्गत कौरवी लोकगीतों पर शोध कार्य
4) समकालीन हिन्दी गीत: दशा और दिशा विषय पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी प्राप्त।
5)भारत सरकार के संस्कृति मत्रालय द्वारा “भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में हिन्दी कविता की भूमिका” विषय पर दो वर्ष हेतु “कनिष्ठ अध्येतावृत्ति प्राप्त।
6) विषय से सम्बन्धित लगभग आधा दर्जन शोध-संगोष्ठियों में भाषण एवं पत्र-वाचन।


प्रकाशित कार्य:
1) पुस्तक “इक पगली लडकी के बिन” {काव्य-संग्रह} वर्ष 1995 में प्रकाशित।
2) पुस्तक “कोई दीवाना कहता है” {काव्य-संग्रह} वर्ष 2007 में Full Circle , हिन्द पाकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित
3) लगभग एक दर्जन लेख, दो सौ कविताएं, नाटक कहनियां, समीक्षाएं देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।
4) लगभग दर्जन भर मानक पुस्तकों की भूमिकाएं लिखीं।
प्रकाशनाधीन कार्य:
1) “उत्तर भारत की लोकोक्ति कथाएं”
2) “भारत का स्वाधीनता आन्दोलन और कविता”
3) “लोकगीतों में लोकचेतना”
4) “शिला चन्द्रमुखी” (काव्य-संग्रह)
काव्य पाठ:
1) विश्व के कई देशों सहित भारत के सभी राज्यों के विभिन्न नगरों में आयोजित 2000 से अधिक काव्य समारोहों में काव्य पाठ एवं संचालन।
2) देश के सभी प्रमुख टी॰वी॰ चैनलों दूरदर्शन, आज तक, सहारा, स्टार, NDTV, SAB TV, ETV ,Zee News पर काव्य-पाठ एवं परिचर्चा।
3) अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिकों के लिए भारत सरकार के अनुरोध पर कश्मीर जा कर काव्य पाठ।
विशिष्ट उपलब्धियां:
1) प्राथमिक से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक जिला, विश्वविद्यालय एवं राज्य स्तर पर वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में प्रतिनिधित्व एवं विभिन्न पुरस्कार
2) स्वरचित काव्य-पाठ प्रतियोगिताओं में सहभागिता एवं पुरस्कार।
3) स्नातक परीक्षा में महाविद्यालय में प्रथम स्थान।
4) स्नातकोत्तर परीक्षा में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान।( Gold Medal)
5) वर्ष 1990 एवं 1991 में प्रकाशित एस॰एस॰वी॰ कालेज, हापुड की पत्रिका ‘चिन्तन’ का छात्र संपादक
6) एम॰एम॰एच॰ कालेज, गाज़ियाबाद द्वारा वर्ष 1991-92 के लिए ‘विशिष्ट’ कवि’ पुरस्कार
7) हिन्दी काव्य मंचों पर 1998 से देश के अधिसंख्य नगरों में सफ़ल काव्यपाठ
8) देश के सभी प्रमुख टी॰वी॰ चैनलों पर काव्यगोष्ठियों में एकल काव्य-पाठ
9) समीक्षा, गाज़ियाबाद द्वारा वर्ष 1993 का ‘युवा साहित्यकार’ पुरस्कार
10) राष्ट्रीय एकता युवा, जबलपुर द्वारा वर्ष 1993 में ‘श्रेष्ठ सृजन’ पुरस्कार
11) डा॰ कुंअर बेचैन काव्य सम्मान एवं पुरस्कार समिति, गाज़ियाबाद द्वारा वर्ष 1994 का ‘काव्य कुमार’ पुरस्कार
12) अखिल भारतीय नारी एवं बाल विकास परिषद , हापुड द्वारा वर्ष 1994 का “काव्य-गंगा” पुरस्कार
13) गुंजन कला सदन, मध्य-प्रदेश द्वारा वर्ष 1996 का “नूर जबलपुरी” पुरस्कार
14) संकल्प, फ़ैजाबाद द्वारा “सवक्तव्य एकल काव्य पाठ” एवं सम्मान
15) एम॰एस॰एम॰ मीडिया कम्पनी के टी॰वी॰ सीरियल के लिए शीर्षक गीत लिखा
16) चन्द्रपुर (महाराष्ट्र) की साहित्यिक संस्था “पैगाम” द्वारा वर्ष 2001 का “पैगाम पुरस्कार” प्राप्त
17) मानस मंच, कानपुर द्वारा वर्ष 2003 का “लाला बालकराम आहूजा सम्मान”
18) बसन्त मित्र मंडल भागलपुर द्वारा वर्ष 2003 का “राष्ट्रकवि नेपाली सम्मान” प्राप्त
19) साहित्य भारती, उन्नाव द्वारा वर्ष 2004 में “डा॰ सुमन अलंकरण”
20) पंडित दीनदयाल उपाध्याय साहित्यिक सेवा संस्था द्वारा “पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्मान” से 2005 में सम्मानित
21) नारायण विद्या आश्रम, किशनी द्वारा “राम शरण गुप्त किशनी स्मृति कवि कौशलेन्द्र सम्मान” से 2005 में सम्मानित
22) हिन्दी-उर्दू अवार्ड कमेटी, उत्तर प्रदेश द्वारा “साहित्य श्री-2006” सम्मान
23) लायंस क्लब और रोटरी क्लब द्वारा कई बार सम्मानित
24)“ईगल वीडियोज़” द्वारा प्रसारित वीडियो कवि सम्मेलन का संचालन
25) इंटरनेट पर अत्यंत लोकप्रिय। आरकुट , याहू, पर कई फ़ैन क्लब एवम यू-ट्यूब, गूगल वीडियो पर कई वीडियो क्लिप्स अत्यंत ही लोकप्रिय।
26) आने वाली एनिमेशन फ़िल्म “जय गणेश” व “कुलई खान” के लिये पट्कथा, संवाद व गीत लेखन।
27) चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा स्वीकृत “कुलगीत” का लेखन

कैसेट:
1) “श्रृंगार स्वर” – स्वर बेला एण्टर्प्राईसेज द्वारा वर्ष 1990 में एक घंटे के काव्यपाठ का कैसेट निर्मित एवं प्रसारित्।
2) “बांसुरी चली आओ”- श्रुति कैसेट्स दिल्ली द्वारा गीतों का कैसेट निर्मित
3) “अग्निसागर” एवम “तालियां” – देश के दो लोकप्रिय कवियों के कैसेटों का समीक्षात्मक टिप्पणियों सहित संचालन।

पता : “सहयोग”, 3/1084, उच्च- श्रेणी भवन, वसुन्धरा, गाज़ियाबाद
दूरभाष- 0120-2883488, 0122-2323000
-मेल - kumarvishvas@gmail.com, kumarvishvas@yahoo.com
वेबसाईट- www.kumarvishwas.com

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कविता इन्हें विरासत में मिली है। कवि के शैशवकाल में ही पिता का देहांत हो गया था। पिता की लेखनी ही इनमें जीती है, ऐसा कवि का मानना है। राजीव रंजन प्रसाद का जन्म बिहार के सुल्तानगंज में २७.०५.१९७२ में हुआ, किन्तु उनका बचपन व उनकी प्रारंभिक शिक्षा छत्तिसगढ राज्य के अति पिछडे जिले बस्तर (बचेली-दंतेवाडा) में हुई। विद्यालय के दिनों में ही उन्होनें एक अनियतकालीन-अव्यावसायिक पत्रिका "प्रतिध्वनि" निकाली। ईप्टा से जुड कर उनकी नाटक के क्षेत्र में रुचि बढी और नाटक लेखन व निर्देशन उनके स्नातक काल से ही अभिरुचि व जीवन का हिस्सा बने। आकाशवाणी जगदलपुर से नियमित उनकी कवितायें प्रसारित होती रही थी तथा वे समय-समय पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हुईं किन्तु अपनी रचनाओं को संकलित कर प्रकाशित करनें का प्रयास उन्होनें कभी नहीं किया। उन्होंने स्नात्कोत्तर की परीक्षा भोपाल से उत्तीर्ण की और उन दिनों वे भोपाल शहर की साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का सक्रिय हिस्सा भी रहे। इन दिनों वे एक प्रमुख सरकारी उपक्रम "राष्ट्रीय जलविद्युत निगम" में सहायक प्रबंधक (पर्यावरण)के पद पर कार्यरत हैं। लेखनी उनकी अब भी अनवरत गतिशील है।

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जन्म: 14 मार्च, 1956
स्थान: पालमपुर, हिमाचल प्रदेश
शिक्षा: प्राइमरी शिक्षा - सेंट पालज हाई स्कूल, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश
माध्यमिक शिक्षा - गोवर्नमेंट हाई स्कूल, इन्ड्रूजगंज, नई दिल्ली
स्नातक - बी. एस . सी. - 1978, गुरु गोविन्द सिहं खालसा कालेज, नोर्थ दिल्ली केम्पस , दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली.
स्नातकोतर - एम. ए . (पब्लिक एडमिन्सट्रेशन) , राजस्थान यूनिवर्सिटी.
रुचि: पुस्तकें बचपन से प्रिय रही हैं. कुछ मन पसन्द पुस्तकों की सूची निम्न है:
प्रतिज्ञा, कफ़न, गौदान, गबन, मानसरोवर नमक का दरोगा, निर्मला - मुन्शी प्रेम चन्द, चन्द्रकान्ता सन्तति - बाबू देवकी नंदन खत्री, मृणालिनी, आनंद मठ - बंकिम चन्द्र चैटर्जी, अनटचेबल - मुल्कराज आनन्द, अतीत के चलचित्र , पथ के साथी, संकल्पिता, हिमालय, सांध्यगीत - महादेवी वर्मा, ट्रेन टू पाकिस्तान - खुशवन्त सिंह, हिमालयन वलन्डर - कर्नल जे पी देहलवी, हू मूव्ड माई चीज - जोनाथन स्पेनसर, और भी बहुत सी जिनके नाम ये अक्सर भूल जाते हैं।
संगीत - भारतीय शास्त्रीय व हल्का संगीत
ग़ज़लें - मेंहदी हसन, मुन्नी बेगम, गुलाम अली, जगजीत सिंह चित्रा सिंह, पिनाज मसानी, पंकज उधास
पुराने हिन्दी फ़िल्मी गाने - मुहम्मद रफ़ी, मुकेश कुमार, किशोर कुमार, मन्नाडे, तलत महमूद, लता मंगेश्कर, आशा भोंसले.
सेवारतः दिसम्बर 1978 - जुलाई 1979 - कृषि मंत्रालय
जुलाई 1979 - नवम्बर 1982 - वित्त मंत्रालय
डारेक्टरोरेट आफ़ इन्टेलिजैन्स (डी.आर .आई)
नवम्बर 1982 के बाद - (निजी सचिव / उप प्रबन्धक)
इन्डियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड, कार्पोरेट आफ़िस, नई दिल्ली .

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नाम : आलोक शंकर
पिता : श्री वीरेंद्र पाण्डेय
जन्म : रामपुरवा बिहार , २५ अक्तूबर १९८३ को .
शिक्षा : विकास विद्यालय रांची में बारहवी तक .
कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से सूचना प्राद्यौगिकी में अभियांत्रिकी | वर्त्तमान में बेंगलुरु में सिस्को सिस्टम्स में सॉफ्टवेर इंजिनियर के रूप में कार्यरत |
साहित्यिक गतिविधियाँ : विभिन्न कवि सम्मेलनों , मुशायरों में काव्य पाठ | रेडियो और विभिन्न वेब साईट पर कवितायें प्रसारित - प्रकाशित | हिंद युग्म के द्वारा यूनिकवि और यूनिपाठक घोषित , और अभी हिंद युग्म के भी सदस्य कवि के रूप में लेखन | हिंद युग्म के काव्यात्मक परिचय की रचना | हिन्दी की सेवा हेतु इन्टरनेट पर कार्यरत |

मेरे चिंतन , मेरे प्रमाद
यह सुखद मौन, हा : यह विषाद
अंतस की तुमुल विविधता री !
यह आलिंगन , या आर्त्तनाद ?

पता : एन ३०२ , श्रीराम समृधि अपार्टमेंट्स , तुबराहल्ली , कुन्दन्हाल्ली गेट के पास | बंगलोर - ६६
दूरभाष : ९९०२९३११८०
ईमेल : alok.shankar@gmail.com

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नाम- श्रीमती सुनीता चोटिया (शानू)
पति- श्री पवन चोटिया
दो पुत्र- आदित्य एवं अक्षय
शिक्षा- होम-साइंस में स्नात्त्कोत्तर
जन्म-तिथि- 06.08.1970
जन्म-स्थल- पिलानी (राजस्थान)
रूचि- लेखन (कविता, कहानी, लेख),चित्रकला, तैराकी, दूरगामी-यात्राएँ
कार्यरत- दिल्ली में स्वयं का चाय निर्यात का व्यापार

बस एक ही बात कहना चाहती हैं ज़िन्दगी के चार पल हैं कुछ हम जी चुके है और कुछ बाकी है जो बाकी है उसे हँसते-हँसते हम सब मिल कर बिता सकें इसके लिये बहुत जरूरी है कि हम एक युग्म की तरह रहें जीवन एक खूबसूरत कविता है और इसे जी भर के जीएँ।

संपर्क-
एम-५०, प्रताप नगर
दिल्ली-५७
ईमेल- shanoo03@gmail.com
चिट्ठा- मन पखेरू फ़िर उड़ चला

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श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' का जन्म 10 अक्तूबर 1959 को उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी स्थित गांव बढवारी ऊधौ में विजयादशमी की पूर्व संध्या पर हुआ। शिक्षक पिता पण्डित सत्यदेव मिश्र एवं धार्मिक माता अन्नपूर्णा देवी के दूसरे पुत्र श्रीकान्त को पिता से उच्च नैतिक मूल्य, वैज्ञानिक सोच तथा धार्मिक मां से सहज मानवीय संवेदना की विरासत मिली। उत्तर प्रदेश की तराई में स्थित गांव के पलाशवनों से घिरे प्राकृतिक परिवेश में सेमर तथा टेशू के फूलों के बीच बचपन में ही प्रकृति से पहला प्यार हो गया। यद्यपि सातवीं कक्षा में पढते हुये पहली बार कविता लिखी फिर भी गद्य पहला प्यार था। रेलवे प्लेटफार्म पर, बस में प्रतीक्षा के दौरान अथवा हरे भरे खेतों के बीच पेड क़े नीचे, हर पल कागज पर कुछ न कुछ लिखते ही रहते। बाद में जीवन की आपाधापी के बीच में गद्य के लिये समय न मिलने से हृदय की कोमल संवेदनायें स्वतः कविता के रूप में पुनः फूट पडीं।

हाईस्कूल की परीक्षा पास के कस्बे बरवर से करने के उपरान्त कालेज की पढायी हेतु काकोरी के अमर शहीद रामप्रसाद 'बिस्मल' के नगर शाहजहांपुर आ गये। आपात स्थिति के दिनों में लोकनायक जयप्रकाश के आह्वान पर छात्र आंदोलन में सक्रिय कार्य करते हुये अध्ययन में भारी व्यवधान हुआ। तत्पशचात बी एस सी अंतिम बर्ष की परीक्षा बीच में छोड वायुसेना में शामिल होकर विद्दयुत इंजीनीयरिंग में डिप्लोमा किया।

कैमरा और कलम से बचपन का साथ निभाते हुये मल्टीमीडिया एनीमेशन, विडियो एडिटिग में विशेषज्ञता और 1997 से 2003 तक नागपुर रहते हुये कम्प्यूटर एप्लीकेशन में स्नातक (बी सी ए) शिक्षा प्राप्त की।

1993 में कीव (यूक्रेन) में लम्बे प्रवास के दौरान पूर्व सोवियत सभ्यता संस्कृति के साथ निकट संपर्क का अवसर मिला। तदुपरान्त अन्य अवसरों पर ओमान, ईरान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान तथा भूटान की यात्रा से वैश्विक विचारों में संपुष्टता हुयी।


वायुसेना में रहते हुये असम के जोरहाट से गुजरात में जामनगर दक्षिण में बंगलौर से लेकर नागपुर, कानपुर, आगरा, चण्डीगढ, चेन्नई और कोलकाता सहित सारे भारत में लम्बे प्रवास से सम्पूर्ण भारतीय होने का गौरव। विभिन्न समाचार पत्रों, कादम्बिनी तथा साप्ताहिक पांचजन्य में कविता लेख एवं कहानी का प्रकाशन। वायुसेना की विभागीय पत्रिकाओं में लेख निबन्ध के प्रकाशन के साथ कई बार सम्पादकीय दायित्व का निर्वहन। विभाग में कम्प्यूटर शिक्षा एवं राजभाषा प्रोत्साहन कार्यक्रमों में सक्रिय योगदान।

संप्रति : वायुसेना मे सूचना प्रोद्यौगिकी अनुभाग में वारण्ट अफसर के पद पर कार्यरत।

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काव्य या यूँ कहें कि साहित्य से इनका लगाव बचपन से ही रहा। इनके पिता जी को हिन्दी काव्य में गहरी रूचि थी। अकसर उनसे कविताएँ सुनते-सुनते कब खुद भी साहित्य-प्रेमी बन गये, पता ही नहीं चला। घर में महाभारत, गीता आदि कुछ धार्मिक किताबें थीं, उनसे स्वाध्याय की जो शुरूआत हुई, वह वक़्त गुजरने के साथ-साथ शौक से ज़रूरत बन गयी। परन्तु अब तक पढ़ने का ये शौक सिर्फ पढ़ने तक ही सीमित रहा था, कभी स्वयं कुछ लिखने का प्रयास नहीं किया। कुछ समय पूर्व अंतरजाल के संपर्क में आए तो पढ़ने के इस सिलसिले को एक नयी दिशा मिली।
हालाँकि अजय यादव के विचार में काव्य में कुछ कहने से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, पाठक को स्वयं किसी विषय पर विचार करने के लिये प्रेरित करना और इस लिहाज से अभी ये खुद को कवि नहीं कह सकते। पर फ़िर भी मन में उठने वाले विचारों को काग़ज़ पर उतार देने का प्रयास करते हैं। यदि इनके इस प्रयास से किसी को एक पल की खुशी मिल सके, किसी को अपने दुख में सांत्वना मिल सके या किसी विषय विशेष की तरफ पल भर को ही सही पाठक का ध्यान आकर्षित हो सके तो ये अपने प्रयास को सार्थक समझेंगे।

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नाम: डॉ. एस. एस. धुर्वे ( साहित्य जगत में वे डॉ. नंदन के नाम से जाने जाते हैं)
जन्म: 5 अक्टूबर 1969, बिलासपुर (छतीसगढ)
शिक्षा: एम.ए (हिन्दी), बी.एड, एल.एल.बी, पी.एच.डी (कवि नागार्जुन की कविताओं का वैचारिक परिप्रेक्ष्य: एक अनुशीलन)
काव्य लेखन की प्रेरणा: गुरुदेव श्री बी. एल. साहू एवं धर्मपत्नि श्रीमति अन्नपूर्णा
प्रकाशित रचनायें: कथादेश, सर्वनाम, आकंठ, सूत्र, असुविधा जैसी पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित। समाचार पत्रों में कविताओं व आलेखों का नियमित प्रकाशन।
संप्रति: स्नातकोत्तर अध्यापक (हिन्दी), केन्द्रीय विद्यालय बचेली।

मोबाइल नं:- 09424170619
ईमेल पता:- ssdhurwe@gmail.com

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नाम- सुषमा गर्ग
शिक्षा- एम.ए, बी.एड, आई. बी. डी॰ (बॉम्बे)
जन्म तिथि- 4.11.1953 नगीना(बिजनौर) उ॰प्र॰
रुचि- साहित्य पठन, लेखन
साहित्यिक गतिविधिया- इन्होंने खूब लिखा है किंतु प्रकाशित न करवाने का कारण अपना संकोची स्वभाव मानती हैं।
संप्रति- अमींनगरसराय के कॉलेज (बागपत जिला) में अध्यापन।
ईमेल:- sushmaguptagarg@gmail.com

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पिता : श्री रामपाल सिंह
माता: श्रीमती राजेश देवी
जन्म दिन : १ जुलाई १९७४
जन्म स्थान: गांव कलंजरी, जिला मेरठ, उत्तर प्रदेश
शिक्षा : प्रारंभिक शिक्षा गांव में, उसके उपरांत अंड्मान और दिल्ली में. बारहवी कक्षा के बाद आजादी बचाओ आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण औपचारिक शिक्षा बींच में ही छोड दी.
रुचियां : सामाजिक विषयों पर चर्चा, कविता लेखन, नाटक लेखन, कहानी लेखन, भाषण करना, नाट्य विधा से विशेष लगाव.
रचनाएं : अब तक कई समाचार पत्र और पत्रिकाओं में कहानी और कविताएं प्रकाशित.
संप्रति: सकाळ टाईम्स में आर्टिस्ट के पद पर कार्यरत.
जीवन साथी : मेरी सहचरी- गीता मेरी मार्गदर्शक भी है और सहभागी भी. मेरी रुचियों में वह मेरा साथ देती हैं.
कुछ दिल की बात: मैं सोचता हूं कि हम सहज हो जाएं इतने सहज जितने के पेड. बिना तिकड़म किये बिना किसी को नुकसान पहुंचाये. संयम और त्याग के साथ ऐसा जीवन जीने का प्रयास करें जो अभी तक तय उत्तम सिद्धांतों पर आधारित हो. एक अच्छा इनसान बनने का प्रयास करें... बस. ... देश से प्यार मेरा दूसरा ध्येय है...... और संस्कृति को तो मैं अपनी मां समझता हूं.....
निवास : वैशाली, गाजियाबाद.
दूरभाष : ९३१२००८१२८

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जन्म: २७ सितंबर १९८४, बिओहारी, छत्तीसगढ़। बचपन मध्य प्रदेश के गुना ज़िले में बीता।

शिक्षा: बी. ई. उपकरण नियन्त्रण प्रौद्योगिकी।

जनवरी २००७ से काग्निज़ेन्ट नामक संस्था में कार्यरत।

कविता कहानियो में बचपन से ही रुचि। मेरा विश्वास है कि समाज को एक सोच और दिशा देने में साहित्य की बडी भूमिका है। कविता का सम्बन्ध केवल रस से न हो कर ह्रिदय के रसातल से भी है। एक ह्रिदयस्पर्शी साहित्यिक रचना अपने आप में एक आन्दोलन है।

सामयिक कवियों में गुलज़ार एवम निदा फ़ाज़ली से उत्प्रेरित।

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मामूली सा कार्टूनिस्ट। चम्बल के एक स्वाभिमानी इलाके भिंड (मध्य प्रदेश्) में जन्म पाया। पिछले २३ सालों से कार्टूनिंग सीख रहा हूँ, एकलव्य की तरह, कितना सीखा ये पाठक तय करें। पढ़ाई-लिखाई के दौरान मिली तमाम डिग्रियों को भूल चुका हूँ मैं, जीवन मैं कहीं काम नही आयीं। कार्टूनिंग के अलावा और कुछ मैं कर ही नही सकता। सच तो ये है कोई दूसरा काम मुझे आता भी तो नही। ग्वालियर, इंदौर, लखनऊ के बाद पिछले एक दशक से जयपुर में राजस्थान पत्रिका से जुड़ कर आम आदमी के दुःख-दर्द को समझने की और उस पीड़ा को साझा करने की कोशिश जारी है.....

संपर्क abhishek3939@gmail.com

अभिषेक तिवारी
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हास्य-व्यंग्य कवि एवं गज़लकार। कविता की ६ मौलिक एवं १० संपादित पुस्तकें प्रकाशित। भारत भर में मंचीय काव्य यात्राएं।
अनेक सरकारी-गैर सरकारी संस्थानों व क्लबों से सम्मानित यथा २००१ में गढ़गंगा शिखर सम्मान २००२ में कलमवीर सम्मान २००४ में करील सम्मान २००६ में युगीन सम्मान २००७ में उदयभानु हंस कविता सम्मान व २००७ में ही पानीपत रत्न से सम्मानित. सब टीवी, जीटीवी, ईटीवी, एमएचवन, चैनलवन, इरा चैनल, इटीसी, जैनटीवी, साधना, नैशनल चैनल आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से नियमित कवितापाठ।

हरियाणा की एकमात्र काव्यपत्रिका कलमदंश का ६ वर्षों से निरन्तर प्रकाशान व संपादन। दैनिक भास्कर में २००० में हरियाणा संस्करण में दैनिक काव्य स्तम्भ तरकश का लेखन। दैनिक जागरण में २००७ में हरियाणा संस्करण में दैनिक काव्य स्तम्भ मजे मजे म्हं का लेखन। पानीपत व करनाल एवं आसपास पचासों अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों के सफल संयोजन में सहभागिता।

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मानस में बिखरे शव्दों को समेटने की कोशिस और दायित्वों के साथ रेत के घरौंदे में उसे साकार देखने का दिवास्वप्न .... इन सब के साथ बटकी में बासी और चुटकी में नमक से संतुष्ट एक छत्तीसगढिया

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नाम: दीपक गुप्ता
जन्म तिथि : 15.03.1972, दिल्ली
शिक्षा : कला स्नातक, दिल्ली विश्वविद्यालय
पता : 90(प्रथम तल) अशोका एंक्लेव (पार्ट-1)
सेक्टर-41] फरीदाबाद&121003, हरियाणा
फोन (मोबाईल):9811153282, 9311153282, 9899753282
0129 – 2250966



बेवसाईट :www. kavideepakgupta.com
-पता : kavideepakgupta@rediffmail.com/yahoo.com/gmail.co.in

प्रकाशित कृतियां: सीपियों में बंद मोती (कविता संग्रह) – 1995
लगभग 12 हास्य व्यंग्य संकलनों में कवितायें प्रकाशित, हिन्दुस्तान दैनिक, नवभारत टाईम्स, कादम्बिनी, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, गगनांचल, मुक्ता, जान्ह्वी, पंजाब केसरी, दैनिक जागरण, अमरक़ उजाला, लोकमत, ट्रिव्यून आदि प्रतिष्ठित समाचार पत्र-पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित

टेलीविजन कार्यक्रम : दिल्ली दूरदर्शन, जनमत, साधना, सिटी केबल, विन केबल, टोटल टीवी, आदि चनलों से विभिन्न कार्यक्रमों का प्रसारण

रेडियो : आकाशवाणी दिल्ली के हिन्दी वार्ता, युववानी, विदेश प्रसारण सेवा तथा राष्ट्रीय चैनल पर विभिन्न कार्यक्रमों का नियमित प्रसारण
सम्मान पुरस्कार: साहित्यिक कृति सम्मान – हिन्दी अकादमी, दिल्ली – 1995-96 (कविता संग्रह – सीपियों में बंद मोती हेतु)
राष्ट्रीय राजीव गाँधी युवा कवि अवार्ड 1992 2वं 1994 सरस्वती रत्न सम्मान, अखिल भारतीय स्वतंत्र लेखक मंच – 2004 संस्कार भारती, हापुड द्वारा सम्मानित – 2006
दिल्ली पब्लिक लाईब्रेरी एवं हिन्दी अकादमी दिल्ली द्वारा आयोजित कविता प्रतियोगिताओं में पुरस्कार अंतर्महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय स्तर पर आयोजित विभिन्न साहित्यिक प्रतियोगिताओं में अनेक पुरस्कार
विदेश यात्रायें : नेपाल 2004, ओमान, मस्कत व सलालाह – 2007

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नाम- अभिषेक सागर
शिक्षा- एम सी. ए जन्म तिथि- 26.11.1978 बेतिया (बिहार)
रुचि- कम्प्यूटर तकनीक से खिलवाड, साहित्य पठन-पाठन
संप्रति एन.एच.पी.सी लिमिटेड में कार्यरत

ईमेल:- abhisheksagar143@gmail.com

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परिचय क्या, एक अनवरत खोज है मेरी, स्वयं को जानने की।

जान पाऊँ, तो संभवतः 'उस' को जान पाऊँ जो अभीष्ट है।

लेखनी ही माध्यम है इस खोज की। साहित्य साधना है, कर रही हूँ, फलेच्छा क्योंकि गीता - धर्म नहीं है, इसलिये गीता पंडित साधना - रत है

केवल रसिक हूँ, अतः समय और अवसर मिलते ही संगीत-कार्यक्रमों में सम्मिलित होने की उत्कंठा बनी रहती है। यदा-कदा नाटकों मे मंच-स्पर्श भी किया घर की दीवारों पर लगे तैल-चित्रों में अपने ही विचारों को चित्रित कर पाने में अंशतः सफलता मिली यूँ सफलता तो सागर-शोधन की तरह है।

एम..इंग.(लिट.) और फिर एम.फिल.(लिंग्विस्टिक्स) किया, किंतु रूप गृहिणी का ही है।

श्रद्धेय जनक, प्रसिद्ध कवि श्री "मदन शलभ" का वरद-हस्त इस विधा में रत रहने की प्रेरणा रहा है। किसी गीत के पहले दो बोल पिता ने घुट्टी में दे दिये होंगे..... उसी गीत को पूर्ण करने के प्रयास मे लगी हूँ वो जहाँ हैं, वहीं से मेरे स्व-धर्म और स्व-कर्म पर दृष्टि रखें।

मेरी प्रथम काव्य-पुस्तक छपने के लियें तैय्यार है...कब....समय मैं भी नहीं जानती...आप सभी की शुभ-कामनाओं की इच्छुक हूँ।

देरी से ही सही अब मन बस लिखते रहना चाहता है.....क्योंकि........


ऐसे सौरभ की घड़ी, फिर से ना आये क्या पता,
आज है जो गीत-सरिता, कल भी होगी क्या पता,
बाँध लो मन इन पलों को,आज शब्दों के वसन में,
और उतारो गीत में फिर, प्रीत की आकाश - गंगा

शेष माँ शारदे के हाथ


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साहित्य शिल्पी के कुछ प्रमुख रचनाकार

अजय कुमार अजय अक़्स
अखिलेश अजय यादव
अदिति मजुमदार डॉ॰ अंजना संधीर
अनवार आलम अनिल कान्त
डॉ. अनिल चड्डा अनिल पाराशर
अनिल पुसदकर अनुपमा चौहान
अब्दुल रहमान मन्सूर अभिषेक “कार्टूनिस्ट"
अभिषेक सागर अम्बरीष श्रीवास्तव
अमन दलाल अमित कुमार राणा
अमितोष मिश्रा डॉ० अरविन्द मिश्र
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अविनाश वाचस्पति प्रो. अश्विनी केशरवानी
डॉ. अ. कीर्तिवर्धन
डॉ० सुरेश तिवारी सुरेश शर्मा
संदीप कुमार सीमा सचदेव
संगीता पुरी सुमन बाजपेयी
संजीव सुशील कुमार
समीर लाल संजीव वर्मा "सलिल"
सुधा भार्गव डॉ० सुधा ओम ढींगरा
सत्यजीत भट्टाचार्य सुभाष नीरव
सतपाल ख्याल सुशील छोक्कर
सुनीता चोटिया सुषमा गर्ग
संजीव तिवारी सूरज प्रकाश
स.र. हरनोट सुदर्शन प्रियदर्शनी
सनत कुमार जैन सुमित सिंह
सुमन 'मीत' सुषमा झा
सुलभ 'सतरंगी' डॉ० सुभाष राय
डॉ० मोहम्मद साजिद खान संगीता मनराल
संजय जनांगल सरोज त्यागी

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