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डा. एम. फिरोज़ अहमद
जन्म 1976 टांडा अम्बेडकरनगर (उत्तर प्रदेश )
शिक्षा एम.ए. पी-एच.डी. (हिन्दी) ए.एम.यू. अलीगढ़, उत्तरप्रदेश, India
सृजन-( 1) मुस्लिम मानस और हिन्दी उपन्यास
(2) नई सदी में कबीर (सं.)
(3) हिन्दी साक्षात्कार उद्भव और विकास (सं.)
(4) हिन्दी के मुस्लिम कथाकार (सं.)
(5) दलित कौन (सं.)
(6) विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 30 आलेख प्रकाशित एवं नेट पर काफी रचनाएं प्रकाशित
सम्प्रति- हिन्दी प्रवक्ता , धर्म ज्योति डिग्री कालेज . अलीगढ
विशेष- co-ordinator radiosabrang.com
सम्पादक- वाङ्मय (रजि.) त्रैमासिक हिन्दी पत्रिका,
बी-4,लिबटी होम्स ,अलीगढ, उत्तरप्रदेश(भारत)
www.vangmay.com
E-mail :vangmaya2007@yahoo.co.in
vangmaya@gmail.com
मोब. +91 941 227 7331


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बम्बई महानगर मे पली बडी हुई - शोर शराबे से दूर, एक आश्रम जैसे पवित्र घर मे , मेरे पापाजी,
स्वर्गीय पँ. नरेन्द्र शर्मा व श्रीमती सुशीला शर्मा की छत्रछाया मे , पल कर बडा होने का सौभाग्य मिला.
मेरे पापाजी एक बुध्धीजिवी , कवि और दार्शिनिक रहे.

मेरी अम्मा , हलदनकर ईनस्टिटयूट मे ४ साल चित्रकला सीखती रही.
१९४७ मे उनका ब्याह हुआ और उन्होने बम्बई मे घर बसा लिया .

मेरा जन्म १९५० नवम्बर की २२ तारीख को हुआ.
मेरे पति दीपक और मै एक ही स्कूल मे पहली कक्षा से साथ साथ पढे है.
मैने समाज शात्र और मनोविग्यान मे बी.ए. होनर्स किया.

२३ वर्ष की आयु मे , १९७४, मे शादी कर के हम दोनो लॉस ~ ऍजिलीस शहर मे , केलीफोर्नीया , यु. स. ए.
३ साल , १९७४,७५,७६ , तक रुके जहा वे ऐम.बी.ए. कर रहे थे.

उस के बाद हम फिर बम्बई लौट आये. परिवार के पास ---
और पुत्री सिदुर का जन्म हुआ. ५ वर्ष बाद पुत्र सॉपान भी आ गये.

१९८९ की ११ फरवरी के दिन पापाजी महाभारत सीरीयल को और हम सब को छोड कर चले गये.

घटना चक्र ऐसे घूमे हम फिर अमरिका आ गये. अब सीनसीनाटी , ओहायो U.S.A. मे हूँ .

पुत्री सौ. सिँदुर का ब्याह हो चुका है और मै नानी बन गई हूँ -
पुत्र चि.सोपान कार्यरत है. डेढ साल पहले उसका ब्याह हो चुका है

जीवन के हर ऊतार चढाव के साथ कविता , मेरी आराध्या , मेरी मित्र , मेरी हमदर्द रही है.

विश्व ~ जाल के जरिये, कविता पढना , लिखना और इन से जुडे माध्यमो द्वारा भारत और अमरीका के बीच की
भौगोलिक दूरी को कम कर पायी हूँ -

स्व ~ केन्द्रीत , आत्मानूभुतियोँ ने , हर बार , समस्त विश्व को , अपना - सा पाया है.

पापाजी पँ. नरेन्द्र शर्मा की कुछ काव्य पँक्तिया दीप ~ शिखा सी , पथ प्रदर्शित करती हुई , याद आ रही है.
" धरित्री पुत्री तुम्हारी, हे अमित आलोक
जन्मदा मेरी वही है स्व्रर्ण गर्भा कोख !"
और

" आधा सोया , आधा जागा देख रहा था सपना,
भावी के विराट दर्पण मे देखा भारत अपना !
गाँधी जिसका ज्योति ~ बीज, उस विश्व वृक़्श की छाया
सितादर्ष लोहित यथार्थ यह नही सुरासुर माया !"

अस्तु विश्व बन्धुत्व की भावना , सर्व मँगल भावना ह्र्दय मे समेटे , जीवन के मेले मे हर्ष और उल्लास की द्रिष्टी लिये , अभी जो अनुभव कर रही हू उसे मेरी कविताओ के जरिये , माँ सरस्वती का प्रसाद समझ कर , मेरे सहभागी मानव समुदाय के साथ बाँट रही हू.
पापाजी की लोकप्रिय पुस्तक " प्रवासी के गीत " को मेरी श्राधाँजली देती , हुई मेरी प्रथम काव्य पुस्तक " फिर गा उठा प्रवासी " प्रकाशित --

" स्वराँजलि" पर मेरे रेडियो वार्तालाप स्वर साम्राज्ञी सुष्री लता मँगेषकर पर व पापाजी पर प्रसारित हुए है.

http://www.historytalking.com/hindi.htm

महभारत सीरीयल के लिये १६ दोहे पापाजी के जाने के बाद लिखे थे !
एक नारी की सँवेदना हर कृति के साथ सँलग्न है. विश्व के प्रति देश के प्रति ,
परिवार और समाज के प्रति वात्सल्य भाव है. भविष्य के प्रति अटल श्रधावान हू.
और आज मेरी कविता आप के सामने प्रस्तुत कर रही हू.
आशा है मेरी त्रुटियोको आप उदार ह्रदय से क्षमा कर देँगे --
विनीत,
- लावण्या


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प्रकाश चंडालिया

About Me

ख़ुद को जानने में समय लगाना व्यर्थ है, ख़ुद को रचने में लगने वाले समय का फिर भी अर्थ है

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About Me

कटिहार में मेरा जन्म हुआ। गत 25 वर्षों से कोलकाता में ही स्थाई निवास। मेरी एक पुस्तक " मारवाड़ी देस का ना परदेस का" प्रकाशित। बचपन से ही कविता, लघुकथा, व सामाजिक लेख लिखना, देश के कई पत्र-पत्रिकाओं में लघुकथा, कविताओं और सामाजिक विषयों पर लेखों का प्रकाशन। स्वतंत्र पत्रकारिता करना व सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनमानस को जगाना। "देवराला सती काण्ड" के विरुद्ध कलकत्ता शहर में जुलूस निकालकर कानून में संसोधन कराने में सक्रिय भूमिका का निर्वाह। सामाजिक विषय पर चिन्तनशील पुस्तक, 'धुन्ध और धूआं' का सम्पादन । कोलकात्ता से प्रकाशित "उद्दघोष" सामाजिक पत्रिका के 'जमुनालाल बजाज विशेषांक' और 'भंवरमल सिंघी विशेषांक' का सम्पादन। समाज के युवाओं को संगठित कर उनको विकासमूलक कार्यों में लगाना। वर्तमान में कोलकात्ता से प्रकाशित "समाज विकास" सामाजिक पत्रिका के सह-संपादक और कथा-व्यथा ई पत्रिका का संपादक।
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* साहित्य जगत में एक मंच की तलाश । मेरा मानना है कि साहित्य के क्षेत्र में समाज के हर वर्ग को अपना योगदान देना चाहिये। जो कलम से दे सकते है
* वे कलम से जो धन से सकते हैं वे धन से इन दोनों का योगदान ही हम साहित्य को सक्षम बना सकतें हँ। - शम्भु चौधरी

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द्वि-भाषिक कवि -- हिन्दी और अंग्रेज़ी।

सन्1941 के लगभग अंत से काव्य-रचना आरम्भ। तब कवि (पन्द्रह वर्षीय) 'विक्टोरिया कॉलेज, ग्वालियर' में इंटरमीडिएट (प्रथम वर्ष) का छात्र था। सम्भवतः प्रथम कविता 'सुख-दुख' है; जो वार्षिक पत्रिका 'विक्टोरिया कॉलेज मेगज़ीन' के किसी अंक में छपी थी। वस्तुतः प्रथम प्रकाशित कविता 'हुंकार' है; जो 'विशाल भारत' (कलकत्ता) के मार्च 1944 के अंक में प्रकाशित हुई।

लगभग छह वर्ष की काव्य-रचना का परिप्रेक्ष्य स्वतंत्रता-पूर्व भारत; शेष स्वातंत्र्योत्तर।

हिन्दी की तत्कालीन तीनों काव्य-धाराओं से सम्पृक्त -- राष्ट्रीय काव्य-धारा, उत्तर छायावादी गीति-काव्य, प्रगतिवादी कविता।

समाजार्थिक-राष्ट्रीय-राजनीतिक चेतना-सम्पन्न रचनाकार।

सन्1946 से प्रगतिवादी काव्यान्दोलन से सक्रिय रूप से सम्बद्ध। 'हंस' (बनारस / इलाहाबाद) में कविताओं का प्रकाशन। तदुपरान्त अन्य जनवादी-वाम पत्रिकाओं में भी। प्रगतिशील हिन्दी कविता के द्वितीय उत्थान के चर्चित हस्ताक्षर।

सन्1949 से काव्य-कृतियों का क्रमशः प्रकाशन।

प्रगतिशील मानवतावादी कवि के रूप में प्रतिष्ठित। समाजार्थिक यथार्थ के अतिरिक्त अन्य प्रमुख काव्य-विषय -- प्रेम, प्रकृति, जीवन-दर्शन। दर्द की गहन अनुभूतियों के समान्तर जीवन और जगत के प्रति आस्थावान कवि। अदम्य जिजीविषा एवं आशा-विश्वास के अद्भुत-अकम्प स्वरों के सर्जक।

काव्य-शिल्प के प्रति विशेष रूप से जागरूक।

छंदबद्ध और मुक्त-छंद दोनों में काव्य-सॄष्टि। छंद-मुक्त गद्यात्मक कविता अत्यल्प। मुक्त-छंद की रचनाएँ भी मात्रिक छंदों से अनुशासित।

काव्य-भाषा में तत्सम शब्दों के अतिरिक्त तद्भव व देशज शब्दों एवं अरबी-फ़ारसी (उर्दू), अंग्रेज़ी आदि के प्रचलित शब्दों का प्रचुर प्रयोग।

सर्वत्र प्रांजल अभिव्यक्ति। लक्षणा-व्यंजना भी दुरूह नहीं। सहज काव्य के पुरस्कर्ता। सीमित प्रसंग-गर्भत्व।

विचारों-भावों को प्रधानता। कविता की अन्तर्वस्तु के प्रति सजग।

26 जून 1926 को प्रातः 6 बजे झाँसी (उ. प्र.) में, ननसार में, जन्म।

प्रारम्भिक शिक्षा झाँसी, मुरार (ग्वालियर), सबलगढ़ (मुरैना) में। शासकीय विद्यालय, मुरार (ग्वालियर) से मैट्रिक (सन्1941), विक्टोरिया कॉलेज, ग्वालियर (सत्र 41-42) और माधव महाविद्यालय, उज्जैन (सत्र : 42-43) से इंटरमीडिएट (सन्1943), विक्टोरिया कॉलेज, ग्वालियर से बी. ए. (सन्1945), नागपुर विश्वविद्यालय से सन्1948 में एम. ए. (हिन्दी) और सन्1957 में 'समस्यामूलक उपन्यासकार प्रेमचंद' विषय पर

पी-एच. डी.

जुलाई 1945 से अध्यापन-कार्य -- उज्जैन, देवास, धार, दतिया, इंदौर, ग्वालियर, महू, मंदसौर में।

'कमलाराजा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, ग्वालियर (जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर) से 1 जुलाई 1984 को प्रोफ़ेसर-अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त।

कार्यक्षेत्र : चम्बल-अंचल, मालवा, बुंदेलखंड।

सम्प्रति शोध-निर्देशक -- हिन्दी भाषा एवं साहित्य।

अधिकांश साहित्य 'महेंद्रभटनागर-समग्र' के छह-खंडों में एवं काव्य-सृष्टि 'महेंद्रभटनागर की कविता-गंगा' के तीन खंडों में प्रकाशित।

सम्पर्क :

डा. महेंद्रभटनागर
सर्जना-भवन, 110 बलवन्तनगर, गांधी रोड, ग्वालियर -- 474 002 [म. प्र.]

फ़ोन : 0751-4092908 / मो. 98 934 09793

E-Mail : drmahendra02@gmail.com

drmahendrabh@rediffmail.com

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4 जून 1958 को सुलतानपुर (उ.प्र.) में जन्मे देवमणि पांडेय

हिन्दी और संस्कृत में प्रथम श्रेणी एम.ए. हैं। अखिल भारतीय स्तर पर लोकप्रिय कवि और मंच संचालक के रूप में सक्रिय हैं। अब तक दो काव्यसंग्रह प्रकाशित हो चुके हैं- "दिल की बातें" और "खुशबू की लकीरें"। मुम्बई में एक केंद्रीय सरकारी कार्यालय में कार्यरत पांडेय जी ने फ़िल्म 'पिंजर', 'हासिल' और 'कहां हो तुम' के अलावा कुछ सीरियलों में भी गीत लिखे हैं। फ़िल्म ' पिंजर ' के गीत '' चरखा चलाती माँ '' को वर्ष 2003 के लिए 'बेस्ट लिरिक आफ दि इयर' पुरस्कार से सम्मानित किया गया।आपके द्वारा संपादित सांस्कृतिक निर्देशिका 'संस्कृति संगम' ने मुम्बई के रचनाकारों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई है।

सम्पर्कः देवमणि पाण्डेयः ए-2,
हैदराबाद एस्टेट,
नेपियन सी रोड,
मालाबार हिल, मुम्बई - 400 036,
M: 99210-82126 / R : 022-23632727,
email : devmanipandey@gmail.com

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नाम : कृष्ण कुमार यादव
जन्म : 10 अगस्त 1977, तहबरपुर, आजमगढ़ (उ0 प्र0)
शिक्षा : एम0 ए0 (राजनीति शास्त्र), इलाहाबाद विश्वविद्यालय
विधा : कविता, कहानी, लेख।
प्रकाशन : देश की प्राय अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं मसलन नया ज्ञानोदय, कादम्बिनी, सरिता, नवनीत, आजकल, वर्तमान साहित्य, उत्तर प्रदेश, अकार, लोकायत, गोलकोण्डा दर्पण, उन्नयन, प्रगतिशील आकल्प, दैनिक जागरण, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा, सीनियर इण्डिया, रायसिना, द सण्डे इण्डियन, इण्डिया न्यूज, अक्षरशिल्पी, अक्षर पर्व, योजना, समर लोक ,युग तेवर, शब्द, मसिकागद, युगीन काव्य, प्रतिश्रुति, अभिनव कदम, सरस्वती सुमन, साहित्य क्रान्ति, साहित्य पारिजात, न्यामती, कथाचक्र, नवोदित स्वर, संयोग साहित्य, झंकृति, शब्द सत्ता, आकण्ठ, प्रयास, अभिनव प्रसंगवश, युद्धरत आम आदमी, आश्वस्त, हिन्दी प्रचार वाणी, मैसूर हिन्दी प्रचार परिषद पत्रिका, राष्ट्रभाषा वर्धा, नारी अस्मिता, इत्यादि सहित 200 से अधिक पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का नियमित प्रकाशन। एक दर्जन से अधिक स्तरीय काव्य संकलनों में रचनाओं का प्रकाशन। इण्टरनेट पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं में रचनाओं की प्रस्तुति।
प्रसारण : आकाशवाणी लखनऊ से कविताओं का प्रसारण।
कृतियाँ : अभिलाषा (काव्य संग्रह-2005), अभिव्यक्तियों के बहाने (निबन्ध संग्रह-2006), इण्डिया पोस्ट-150 ग्लोरियस इयर्स (अंग्रेजी-2006), अनुभूतियाँ और विमर्श (निबन्ध संग्रह-2007), क्रान्ति यज्ञ :1857-1947 की गाथा (2007)। बाल कविताओं व कहानियों के संकलन प्रकाशन हेतु प्रैस में।
सम्मान : विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्थानों द्वारा सोहनलाल द्विवेदी सम्मान, कविवर मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, महाकवि शेक्सपियर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान, काव्य गौरव, राष्ट्रभाषा आचार्य, साहित्य-मनीषी सम्मान, साहित्यगौरव, काव्य मर्मज्ञ, अभिव्यक्ति सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, साहित्य श्री, साहित्य विद्यावाचस्पति, देवभूमि साहित्य रत्न, सृजनदीप सम्मान, ब्रज गौरव, सरस्वती पुत्र और भारती-रत्न से अलंकृत। बाल साहित्य में योगदान हेतु भारतीय बाल कल्याण संस्थान द्वारा सम्मानित।
विशेष : व्यक्तित्व-कृतित्व पर एक पुस्तक ''बढ़ते चरण शिखर की ओर : कृष्ण कुमार यादव" शीघ्र प्रकास्य। सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार डा0 राष्ट्रबन्धु द्वारा सम्पादित 'बाल साहित्य समीक्षा' (सितम्बर 2007) एवं इलाहाबाद से प्रकाशित 'गुफ्तगू' (मार्च 2008) द्वारा व्यक्तित्व-कृतित्व पर विशेषांक प्रकाशित।अभिरूचियाँ : रचनात्मक लेखन व अध्ययन, चिंतन, फिलेटली, पर्यटन।
सम्पर्क : कृष्ण कुमार यादव, भारतीय डाक सेवा, वरिष्ठ डाक अधीक्षक, कानपुर मण्डल, कानपुर-208001
kkyadav.y@rediffmail.com मोबाइल - 09415742553

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नाम : आकांक्षा यादव

जन्म : 30 जुलाई 1982, सैदपुर, गाजीपुर (उ0 प्र0)

शिक्षा : एम0 ए0 (संस्कृत)

विधा : कविता, लेख व लघु कथा

प्रकाशन : देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं मसलन - साहित्य अमृत, कादम्बिनी, युगतेवर, अहा जिन्दगी, इण्डिया न्यूज, रायसिना, दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला, गोलकोण्डा दर्पण, युद्धरत आम आदमी, अरावली उद्घोष, प्रगतिशील आकल्प, शोध दिशा, सामान्यजन संदेश, समाज प्रवाह, राष्ट्रधर्म, सेवा चेतना, समकालीन अभिव्यक्ति, सरस्वती सुमन, शब्द, लोक गंगा, कल्पान्त, नवोदित स्वर, आकंठ, प्रयास, गृहलक्ष्मी, गृहशोभा, मेरी संगिनी, वुमेन आन टाप, बाल साहित्य समीक्षा, वात्सल्य जगत, जगमग दीप ज्योति, प्रज्ञा, पंखुड़ी, कथाचक्र, नारायणीयम्, मयूराक्षी, मैसूर हिन्दी प्रचार परिषद पत्रिका, हिन्दी प्रचार वाणी, गुर्जर राष्ट्रवीणा इत्यादि सहित 100 से ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन। लगभग एक दर्जन प्रतिष्ठित काव्य संकलनों में कविताओं का प्रकाशन।

सम्पादन : ’’क्रान्ति यज्ञ : 1857-1947 की गाथा’’ पुस्तक में सम्पादन सहयोग।

वेब पेज : http://www.poetrypoem.com/akanksha
http://www.writebay.com/akanksha
http://www.poetryvista.com/akanksha

सम्मान :
साहित्य गौरव (2006) - इन्द्रधनुष साहित्यिक संस्था, बिजनौर, उ0प्र0
साहित्य श्री (2006) - श्री मुकुन्द मुरारी स्मृति साहित्य संस्थान, कानपुर
भारती ज्योति (2007) - राष्ट्रीय राजभाषा पीठ, इलाहाबाद
साहित्य मनीषी सम्मान (2007)- मध्य प्रदेश नवलेखन संघ, भोपाल
साहित्य सेवा सम्मान (2007)- छत्तीसगढ़ शिक्षक-साहित्यकार मंच
काव्य मर्मज्ञ (2007)- इन्द्रधनुष साहित्यिक संस्था, बिजनौर, उ0प्र0
देवभूमि साहित्य रत्न (2008)- देवभूमि साहित्यकार मंच, पिथौरागढ़, उत्तरांचल
भारत गौरव (2007)- ऋचा रचनाकार परिषद, कटनी, म0प्र0
वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान (2007)- भारतीय दलित साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
शब्द माधुरी (2008)- ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद, ग्वालियर
ब्रज-शिरोमणि (2008)- आसरा समिति, मथुरा
‘‘एस0एम0एस0‘‘ कविता पर प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा नकद पुरस्कार।

विशेष: दिल्ली से प्रकाशित नारी सरोकारों को समर्पित पत्रिका ‘‘वुमेन आन टाप‘‘ द्वारा देश की 13 अग्रणी नारियों में स्थान।

अभिरूचियाँ : रचनात्मक अध्ययन व लेखन। नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक समस्याओं सम्बन्धी विषय में विशेष रूचि ।

सम्प्रति : प्रवक्ता, राजकीय बालिका इण्टर कालेज, नरवल, कानपुर (उ0प्र0)-209401

सम्पर्क : आकांक्षा यादव पत्नी- श्री कृष्ण कुमार यादव, भारतीय डाक सेवा, वरिष्ठ डाक अधीक्षक, कानपुर मण्डल, कानपुर-208001 ई-मेल: kk_akanksha@yahoo.com

साहित्यकार के रूप में: एक साहित्यकार के रूप में आकांक्षा यादव ने बहुत ही खुले नजरिये से संवेदना के मानवीय धरातल पर जाकर अपनी रचनाओं का विस्तार किया है। बिना लाग लपेट के सुलभ भाव भंगिमा सहित जीवन के कठोर सत्य उभरें यही आपकी लेखनी की शक्ति है। आपकी रचनाओं में जहाँ जीवंतता है, वहीं उसे सामाजिक संस्कार भी दिया है। निश्चितत:, आकांक्षा जी ने अपने मनोभावों को जो शब्दाभिव्यक्ति दी है, वह विलक्षण है और अन्तर्मन से विशुद्ध साहित्यिक है। समकालीन साहित्यकारों की रचनाओं पर दुर्बोधता के कारण उनकी ग्रहणीयता या आस्वादकता पर जो प्रश्नचिन्ह लगाया जाता है, वह आकांक्षा जी की रचनाओं में नहीं है।


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नाम: सुभाष नीरव


जन्म: 27–12–1953, मुरादनगर (उत्तर प्रदेश)

शिक्षा: स्नातक, मेरठ विश्वविद्यालय

कृतियाँ:‘यत्कचित’, ‘रोशनी की लकीर’ (कविता संग्रह)
‘दैत्य तथा अन्य कहानियाँ’, ‘औरत होने का गुनाह’
‘आखिरी पड़ाव का दु:ख’(कहानी-संग्रह)
‘कथाबिंदु’(लघुकथा–संग्रह),
‘मेहनत की रोटी’(बाल कहानी-संग्रह)

लगभग 12 पुस्तकों का पंजाबी से हिंदी में अनुवाद, जिनमें
“काला दौर”, “कथा-पंजाब – 2”, कुलवंत सिंह विर्क की चुनिंदा पंजाबी कहानियाँ”, “पंजाबी की चर्चित लघुकथाएं”, “तुम नहीं समझ सकते”(जिन्दर का कहानी संग्रह), “छांग्या रुक्ख”(बलबीर माधोपुरी की दलित आत्मकथा) और “रेत” (हरजीत अटवाल का उपन्यास) प्रमुख हैं।

सम्पादन अनियतकालीन पत्रिका ‘प्रयास’ और मासिक ‘मचान’ ।

ब्लॉग्स: सेतु साहित्य( उत्कृष्ट अनूदित साहित्य की नेट पत्रिका )
www.setusahitya.blogspot.com


वाटिका(समकालीन कविताओं की ब्लॉग पत्रिका)
www.vaatika.blogspot.com


साहित्य सृजन( साहित्य, विचार और संस्कृति का संवाहक)
www.sahityasrijan.blogspot.com


गवाक्ष (हिंदी–पंजाबी के समकालीन प्रवासी साहित्य की प्रस्तुति)
www.gavaksh.blogspot.com


सृजन–यात्रा ( सुभाष नीरव की रचनाओं का सफ़र)
www.srijanyatra.blogspot.com


पुरस्कार/सम्मान: हिन्दी में लघुकथा लेखन के साथ-साथ पंजाबी-हिन्दी लघुकथाओं के श्रेष्ठ अनुवाद के लिए ‘माता शरबती देवी स्मृति पुरस्कार, 1992’ तथा ‘मंच पुरस्कार, 2000’ से सम्मानित।

सम्प्रति :भारत सरकार के पोत परिवहन मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी(प्रशासन)।

सम्पर्क: 248, टाईप–3, सेक्टर–3, सादिक नगर, नई दिल्ली–110049

ई मेल: subhashneerav@gmail.com
subhneerav@gmail.com


दूरभाष : 011–26264912(निवास)
09810534373

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राष्ट्रभाषा नव-साहित्यकार परिषद के संस्थापको मे से एक और वर्तमान मे महासचिव 17 दिसम्बर 1953 मे तत्कालीन जिला मेरठ और अब बागपत के गाँव मीतली मे जन्में पी. के. शर्मा याने पवनचंदनकी काव्य रचनाओ मे बागपत के खरबूजों की मिठास का रसास्वादन किया जा सकता है। कला स्नातक पवन चंदन का मन कवि महेन्द्र प्रसाद चातक की कविता सुन हिलोरें लेने लगा और उन्होने वर्ष 1974 मे लेखन की शुरूआत की। सन 1977 की जनता पार्टी की खिचड़ी सरकार पर दैनिक नवभारत टाइम्स में प्रकाशित कटाक्ष से प्रकाशन का जो क्रम आरंभ हुआ वो आज तक निरंतर जारी है

दो दल मिल जाएं आपस मे तो बन जाता है दल-दल
यहां तो छह छह मिल बैठें हैं होय लडाई हर पल
होय लडाई हर पल फंसी भंवर में गाड़ी

इस गाड़ी के ब्रेक मार जयी राजनारायण की दाढ़ी
जनता की सरकार यहाँ फस बैठी दल दल में
बेमौसम का मानसून जब आया जनता दल में

तत्पश्चात स्वर्गीय श्री राधेश्याम प्रगल्भ अवसर और श्री अशोक चक्रधर के प्रोत्साहन से पल्लवित काव्य रचनाओं की गूँज मंचो के माध्यम से जहाँ जहाँ तक सुनाई पड़ी चंदन की लेखनी की धार और व्यंग्य की तीखी मार की विद्वत्जनों द्वारा खूब सराहना की गयी। पहला मंच मिला दिल्ली की महावीर वाटिका मे, जिसमें सान्निध्य रहा काका हाथरसी, देवराज दिनेश, माणिक वर्मा सरीखे दिग्गज कवियों का और चंदन की तत्कालीन गृहमंत्री चौधरी चरण सिंह के बीमार होने उनकी कारगुजारियों पर सुनाई गयी व्यंग्य की इन पंक्तियों ने खूब वाह वाह लूटी कि

तबियत मचली मंत्री जी की हालत डांवाडोल
दिल का दर्द उठा था उनको नही सके बोल
नही सके बोल के कैसा दर्द है उनका
डॉक्टर बोले झट से ले लो एक्सरे इनका
लिया एक्सरे समझे चंदन कैसा दर्द है मंत्री का
हड्डी-पसली कुछ नही आई फोटो आया इंदिरा जी का

इस कार्यक्र्म का संचालन किया प्रगल्भ जी ने। सिर्फ गद्द ही नहीं पद्द मे भी भरपूर लिख छप रहे है। इनके व्यंग्य पाठकों को इतने अदिक भाये कि उन्होने अपने नाम से राष्ट्रीय स्तर के अखबारों मे अपने नाम से छपवाये। जिसके लिये अखबारो ने खेद व्यक्त किया। इनकी रचनायें राष्ट्रीय सहारा, बालवाणी, नई दुनिया, अमर उअजाला, दैनिक ट्रिब्यून इत्यादि मे खूब छप रही है। कलमवाला, फिल्म फैशन संसार पत्रिकाओं मे संपादकिय विभाग से जुडे रहे।तेतालाऔर नवें दशक के प्रगतिशील कवि काव्य संग्रह के एक प्रमुख हस्ताक्षर। संप्रति भारतीय रेल सेवा से संबंद्ध।


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प्राण शर्मा का जन्म १३ जून १९३७ को वजीराबाद (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था. प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली में. पंजाब विश्वविद्यालय से एम.ए.(हिन्दी). १९५५ से लेखन . फिल्मी गीत गाते-गाते गीत , कविताएं और ग़ज़ले कहनी शुरू कीं.

१९६५ से ब्रिटेन में.

१९६१ में भाषा विभाग, पटियाला द्वारा आयोजित टैगोर निबंध प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार. १९८२ में कादम्बिनी द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कहानी प्रतियोगिता में सांत्वना पुरस्कार. १९८६ में ईस्ट मिडलैंड आर्ट्स, लेस्टर द्वारा आयोजित कहानी प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार.

लेख - 'हिन्दी गज़ल बनाम उर्दू गज़ल" पुरवाई पत्रिका और अभिव्यक्ति वेबसाइट पर काफी सराहा गया. शीघ्र यह लेख पुस्तकाकार रूप में प्रकाश्य.

२००६ में हिन्दी समिति, लन्दन द्वारा सम्मानित.
"गज़ल कहता हूं' और 'सुराही' - दो काव्य संग्रह प्रकाशित.


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मैं देवेश वशिष्ठ उर्फ खबरी. खबरी नाम मेरी आवारगी और घुमक्कड जिंदगी से जुड़ा है. आगरा में 6 अगस्त 1985 को पैदा हुआ. 15 वर्ष का था तब एक स्थानीय टीवी चैनल में बच्चों के शो की एंकरिंग करने लगा. दो साल तक वहीं पत्रकारिता भी की. शहर का सबसे कम उम्र पत्रकार होने की वजह से बाकी बड़े बुजुर्ग खबरिया लोग 'छोटा खबरी' नाम से पुकारने लगे. बड़ा हुआ तो छोटा शब्द हटकर सिर्फ खबरी रह गया. बाबा स्व. श्री रामनारायण शर्मा संस्कृत के मूर्धन्य विद्वान थे, और पिताजी श्री दिनेश कुमार शर्मा ब्रज भाषा में कविता करते थे. इसलिए कविता और साहित्य के संस्कार वहीं से मिले. पहली कविता कब लिखी थी, ठीक से याद नहीं लेकिन पांचवी क्लास में किसी स्कूली समारोह में अपनी लिखी कविता ही गाई थी. आगरा छोड़ा, भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रिकारिता विश्वविद्यालय से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की और फिर देहरादून में स्वास्थ्य महानिदेशालय के लिए डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाने लगा. दिल्ली लौटा तो कई प्रोडक्शन हाऊसों में कैमरामैन, वीडियो एडिटर और कंटेन्ट राइटर की नौकरी करते हुए लाइव इंडिया चैनल में असिस्टेंट प्रड्यूसर जॉइन किया. साल भर तक काम करने के बाद मन उचटा तो इंडिया न्यूज में प्रड्यूसर हो गया. आजकल तहलका की हिंदी मैगजीन में सीनियर कॉपी एडिटर काम कर रहा हूं.
देवेश वशिष्ठ खबरी
संपर्क-9811852336
http://deveshkhabri.blogspot.com/

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परिचय

नाम: सतपाल ख्याल

उम्र: ३५ साल

पेशा: ईंजीनियर.

निवास: हिमाचल ( बद्दी)

प्रकाशन:

समय-समय पर कई पत्र-पत्रिकाओं मे छपता रहा हूँ|, और एक साल से अदब की सेवा कर रहा हूँ| एक ब्लाग का संचालन कर रहा हूँ जो केवल ग़ज़ल को समर्पित है| कई नेट पत्रिकाओं जैसे अनुभुति आदि पर सम्मान से छ्पा हूँ| एक ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन है . बाकी शायरी मेरा शौक़ नही जिंदगी है|


अन्य ब्लोग: http://aajkeeghazal.blogspot.com/



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अनुपमा चौहान का जन्म मुम्बई के नजदीक तारापुर नामक स्थान पर हुआ, वहीं इनकी प्राथमिक शिक्षा-दीक्षा हुई। उसके उपरांत कवयित्री ने M.B.E.S. कॉलेज़ ऑफ़ इंजीनियरिंग (औरंगाबाद विश्वविद्यालय) से B.E. की डिग्री प्राप्त की। इनके पिता 'भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र' में वैज्ञानिक अधिकारी एवम् माँ एक अध्यापिका हैं। इनका परिवार मुम्बई में ही निवास कर रहा है जबकि इनका मूल कानपुर (उत्तर प्रदेश) है। वर्तमान में कवयित्री पुणे की USA आधारित एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में वरिष्ठ साफ़्टवेयर परीक्षण अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। कविता से इनका परिचय बहुत पुराना है, स्कूल से ही कविता का रस लेती आयी हैं। सबसे पहली बार इनकी कविता का प्रकाशन, कॉलेज स्तरीय पत्रिका में हुआ था। कविता के अतिरिक्त इनकी दिलचस्पी चित्रकारी और नृत्य में भी बहुत है। इन्होंने कई 'शो' को होस्ट भी किया है। एक फैशन शो का आयोजन भी कर चुकी हैं। अपनी चित्रों की एक प्रदर्शनी भी लगा चुकी हैं जहाँ उन्हें उस प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ चित्रकार के सम्मान से सम्मानित किया गया। परंतु, कविता इनके लिए दुआ के समान है, जिसे पढ़े बिना रहना इनके लिए मुमकिन नहीं।

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नाम- रितु रंजन जन्म तिथि- 1.071980, भागलपुर(बिहार)
रुचि- लेखन
साहित्यिक गतिविधिया- घर के साहित्यिक माहौल नें लिखने के लिये प्रेरित किया। अब ब्ळोगजगत में सक्रिय।
ईमेल:- rituranjan102@gmail.com

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“परिस्थितियाँ व प्रोत्साहन कभी भी, किसी को भी कवि बना सकते हैं” ऐसा मानना है कवियत्री रचना सागर का। रचना सागर का जन्म 25 दिसम्बर 1982 को बिहार के छ्परा नामक छोटे से कस्बे के एक छोटे से व्यवसायिक परिवार मे हुआ। इनकी शिक्षा-दीक्षा भी वहीं हुई। आरंभ से ही इन्हे साहित्य मे रुची थी किंतु कविता भी ये लिख सकती हैं इन्होंने तब तक नहीं सोचा था, जब तक कि एक घटना ने इनकी सोच को नहीं बदल दिया। एक बार स्कूल के एक नाटक में हिस्सा लेने के लिये इन्होंने अपनी तैयारी की और बहुत खुश हो अपने पिता जी को भी अपने साथ ले गई। इनके पिता जी ने जब देखा कि ये इतने लोगों (स्कूल व बाहर) के सामने नाटक में हिस्सा लेंगी तो यह बात इनके पिता को अच्छी नहीं लगी और इनके नहीं चाहने के बावजूद घर ले आये। इस घटना ने इन्हें अंतर्मुखी बनाया और तब इन्होंने सोचा की जब बाहर नहीं जा सकते तो कविता को ही अपना माध्यम चुना जाय। उसी दौरान इन्होंने अपनी पहली रचना प्यारे फूल (01/10/1995) में लिखी। परिस्थितिवश ये आगे ज्यादा लिख नही पाईं और जो भी लिखा उसे प्रकाशित न करा सकीं। तथापि इनकी रचनात्मकता थमी नहीं और कविताओ और रचनाओ को अच्छी तरह समझने हेतु उर्दु भाषा का गहन अध्ययन किया। साथ ही मनोविज्ञान में परास्नातक (M.A.) की परीक्षा उत्तीर्ण की जिससे बच्चों के मनोविज्ञान के ऊपर कुछ किया जा सके। शादी के पश्चात पति अभिषेक जी के द्वारा राजीव रंजन प्रसाद जी के सम्पर्क मे आईं और राजीव जी के प्रोत्साहन , पति और बच्ची (आर्श्या) के प्रेरणा से फिर से लिखना शुरू किया और अंतरजाल पर अपना ब्लॉग "मेरी कुछ यादें” पर लिखा।

ई-मेल- rachnasagar143@gmail.com
पता- पत्नि श्री अभिषेक सागर
मकान संख्या- 250 , सेक्टर -30
फ़रीदाबाद (हरियाणा)- 121003

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विश्वदीपक “तनहा” का जन्म बिहार के सोनपुर में २२ फरवरी १९८६ को हुआ था। सोनपुर हरिहरक्षेत्र के नाम से विख्यात है, जहाँ हरि और हर एक साथ एक हीं मूर्त्ति में विद्यमान है और जहाँ एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला लगता है। पूरा क्षेत्र मंदिरों से भरा हुआ है। इसलिए ये बचपन से हीं धार्मिक माहौल में रहे, लेकिन कभी भी पूर्णतया धार्मिक न हो सके। पूजा-पाठ के श्लोकों और दोहों को कविता की तरह हीं मानते रहे। पर इनके परिवार में कविता, कहानियों का किसी का भी शौक न था। आश्चर्य की बात है कि जब ये आठवीं में थे, तब से पता नहीं कैसे इन्हें कविता लिखने की आदत लग गई । फिर तो चूहा, बिल्ली, चप्पल, छाता किसी भी विषय पर लिखने लगे। इन्होंने अपनी कविताओं और अपनी कला को बारहवीं कक्षा तक गोपनीय ही रखा । तत्पश्चात मित्रों के सहयोग और प्रेम के कारण अपने क्षेत्र में ये कवि के रूप में जाने गये । बारहवीं के बाद इनका नामांकन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के संगणक विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग में हो गया । कुछ दिनों तक इनकी लेखनी मौन रही,परंतु अंतरजाल पर कुछ सुधि पाठकगण और कुछ प्रेरणास्रोत मित्रों को पाकर वह फिर चल पड़ी । ये अभी भी क्रियाशील है। इनकी सबसे बड़ी खामी यह रही है कि इन्होंने अभी तक अपनी कविताओं को प्रकाशित होने के लिये कहीं भी प्रेषित नहीं किया।

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इनका जन्म उत्तरांखण्ड की राजधानी देहरादून में १४ मार्च सन् १९५८ में हुआ। हिन्दी साहित्य में प्रारम्भ से ही रुचि रही। विद्यार्थी काल में ही शरद, प्रेमचन्द, गुरूदत्त, भगवती शरण, शिवानी आदि को पढ़ा। लेखन में भी रुचि प्रारम्भ से ही रही। हमेशा अपने जीवन के अनुभवों को डायरी में लिखा। कभी आक्रोश, कभी आह्लाद, कभी निराशा लेखन में अभिव्यक्त होती रही किन्तु जो भी लिखा स्वान्तः सुखाय ही लिखा। लेखन के अतिरिक्त भाषण, नाटक और संगीत में इनकी विशेष रुचि है। इन्होंने गढ़वाल विश्व विद्यालय से हिन्दी विषय में स्नातकोत्तर परीक्षा पास की है। वर्तमान में फरीदाबाद शहर के 'मार्डन स्कूल' में हिन्दी की विभागाध्यक्ष हैं। हिन्दी के प्रति सबका प्रेम बढ़े और हिन्दी भाषा बोलने और सीखने में सब गर्व का अनुभव करें, यही इनका प्रयास है।

ईमेल- ritbansal@gmail.com

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परिचय

उपासना अरोरा


जन्म : २४ जून १९८६, नई दिल्ली ( यही पर पली और बड़ी हुई हूँ)


शिक्षा : एम.
बी. ए.


संप्रति : नवम्बर २००७ से एक हेनले इंडस्‍ट्रीज नामक संस्था में कार्यरत

कविता लिखने का शौक बचपन से ही रहा है और ११ साल की उम्र से लिख रही हूँ। कविताओं को लेकर कभी किसी विचारधारा को नही माना, सिर्फ़ इतना ही जानती हूँकि मेरे मन में सभी विचार काव्‍यात्‍मक रूप में ही आते हैं, कभी कलम से कागज़ पर उतर जाते हैं तो कभी सोच में ही गुम हो जाते है । भाषा या शैली के दायरे में स्वयंको कभी नही बाँधा, क्यूंकि जब सोच को मैं किसी दायरे में नही रख सकती तो कविता को कैसे रख पाउंगी॥



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नाम मीनाक्षी जिजीविषा

संप्रति माधव कुंज, 892/10, हाउसिंग बोर्ड कालोनी, फरीदाबाद

कृतियाँ अनेक संयुक्त काव्य संकलन प्रकाशित, जिनमें से प्रमुख हैं क्षितिज खोजते पखेरू, सृजन के झहरोखे से, यादें, काव्यधारा, काव्यांजलि, इन्द्रपिनाक इत्यादि। पलकों पर रखे स्वप्न फूल (हिन्दी अकादमी द्वारा पुरस्कृत वर्ष 2001), दिल के मौसम (काव्य संग्रह हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत वर्ष 2005-2006) लघुकथा संग्रह। इस तरह से भीस्त्री होने के मायने काव्यसंग्रह प्रकाशन में, लगभग सभी पत्र पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित, प्रमुख हैं दैनिक ट्रिव्यून, दैनिक भासकर, राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण, हंस, इंडिया न्यूज, वागर्थ, कादम्बनी, कथादेश, आजकल, पल-प्रतिपल, सीनियर इंडिया, इस्पात भाषा भारतीय साहित्य।

साहित्यिक पत्रिका साहित्य जनमंच की उप संपादिका

गतिविधियाँ साहित्य कला संगम (हिसार, राज्तकवि उदयभानू हंस की संस्था की सक्रिय सदस्य), ऋचा (अखिल भारतीय लेखिका संख दिल्ली, स्व. दिनेश नंदिनी डालमिया की साहित्यिक संस्था), युवा चेतना मंडल (दिल्ली) की सदस्या, पहचान (नारी अभिव्यक्ति मंच फरीदाबाद) की सक्रिय सदस्य, अखिल भारतीय राजभाषा विकास परिषद (गाजियाबाद) की सक्रिय सदस्य।

सम्मान महीयसी महादेवी वर्मा सम्मान से सम्मानित वर्ष 2001

दीपशिखा सम्मान से सम्मानित वर्ष 2002

सुभद्रा कुमारी चौहान सम्मान से समानित - वर्ष 2003

सूरीनाम के राजदूत कृष्णदत्त बैजनाथ द्वारा राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान से सम्मानित वर्ष 2005

वुमन अचीवर ऑफ हरियाणा से सम्मानित वर्ष वर्ष 2006-07

हंस कविता सम्मान से सम्मानित वर्ष 2008



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विपुल शुक्ला का जन्म गाडरवारा जिला नरसिहपुर मे 28 मार्च 1988 को हुआ। कवि की पूरी शिक्षा-दीक्षा भोपाल के निकट होशंगाबाद मे हुई। इन्होनें जिस विद्यालय मे शिक्षा ग्रहण की उसी विद्यालय में इनकी माताश्री श्रीमती आभा शुक्ला हिन्दी की शिक्षिका थी। इसीलिये बचपन से ही हिन्दी विषय पर बहुत ध्यान दिया जाता था। अपनी पहली कविता इन्होनें विद्यालय की पत्रिका "प्रगति" के लिये कक्षा ग्यारहवीं में लिखी। उन दिनो अक्सर पाठ्यक्रम की किताब में कविताओं की किताब रखकर पढा करते थे और पकड़े जाने पर माताश्री से डाँट भी खाते थे। इनके अनुसार काव्य प्रतिभा इन्हें अपनी माँ से विरासत मे मिली है। विपुल हिंद-युग्म के यूनिकवि रह चुके हैं तथा वर्तमान में आई.पी.एस. एकेडेमी, इन्दौर में रसायन अभियांत्रिकी चतुर्थ वर्ष के छात्र हैं।

पता:- ३९ प्रगति नगर, इंदौर
दूरभाष :- 9926363028
मेल :-vipul283@gmail.com


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दिल्ली के राजीव तनेजा की हास्य-व्यंग्य पढ़ने और लिखने में विशेष रुचि है। वे बी कॉम करने के बाद रैडीमेड दरवाज़े और खिड़कियों का व्यवसाय करते हैं। कुछ कहानियाँ तथा व्यंग्य रचनाएँ प्रकाशित 'हँसते रहो' नाम के एक चिट्ठा लोकप्रिय।

संपर्क- rajivtaneja2004@gmail.com

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अविनाश वाचस्पति का जन्म 14 दिसंबर 1958 को हुआ। आप दिल्ली विश्वविद्यालय से कला स्नातक हैं। आप सभी साहित्यिक विधाओं में समान रूप से लेखन कर रहे हैं। आपके व्यंग्य, कविता एवं फ़िल्म पत्रकारिता विषयक आलेख प्रमुखता से पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। आपने हरियाणवी फ़ीचर फ़िल्मों 'गुलाबो', 'छोटी साली' और 'ज़र, जोरू और ज़मीन' में प्रचार और जन-संपर्क तथा नेत्रदान पर बनी हिंदी टेली फ़िल्म 'ज्योति संकल्प' में सहायक निर्देशक के तौर पर भी कार्य किया है। वर्तमान में आप फ़िल्म समारोह निदेशालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, नई दिल्ली से संबद्ध हैं।


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नाम - बुधराम यादव

पिता - श्री भोंदू राम यादव

जन्मतिथि - ग्राम खैरवार खुर्द तहसील लोरमी , जिला मुक्यालय बिलासपुर से
80 किलोमीटर दूर.

शैक्षणिक योग्यता -सिविल अभियांत्रिकी में पत्रोपाधि अभियंता.
साहित्यिक अभिरुचि - छत्तीसगढ़ और हिन्दी में गीत, कविता, लेखा
साहित्यिक गतिविधियाँ - वर्ष 1964 में उच्चतर माध्यमिक शिक्षा का विद्यार्थी था तब से छत्तीसगढ़ी एवम हिन्दी में गीत एवम कविता लेखन में गहन अभिरुचि हो चुकी थी संयोग से विविध काव्य संग्रहों, पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही . साथ ही अनेक मंचों तथा आकाशवाणी के माध्यम से प्रसारण के अवसर भी उपलब्ध होते रहे .


१९६४ में प्रयास प्रकाशन बिलासपुर से संस्थापक सदस्य के रूप में सम्बद्ध रहे. यहाँ से प्रकाशित प्रथम छत्तीसगढ़ी गीत संग्रह "सुघ्घर गीत" में प्रथम रचना प्रकाशित हुई.

१९६५-६६ में हिन्दी के राष्ट्रीय स्तर काव्य संग्रह "मैं भारत हूँ" , "खौलता खून" , एवम प्रदेश स्तर के "छत्तीसगढ़ के नए हस्ताक्षर", "नए गीत", "थिरकते बोल" , "भोजली" , "छत्तीसगढ़ी सेवक", "लोकाक्षर" , भिलाई से प्रकाशित गीत संग्रह "जागरण गीत" के अतिरिक्त कई अवसरों पर दैनिक बसेरा , संकेत राजनांदगांव , दैनिक महाकोशल, देशबंधु, बिलासपुर टाईम्स , नवभारत, आदि पत्र पत्रिकाओं के साथ अन्य अनेक काव्य संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित होती रही.


माँ वीणावादिनी की महती कृपा से १९७२ से कवि सम्मेलनों के विविध आयोजनों मंचों के माध्यम से देश-प्रदेश के लब्ध प्रतिष्ठ साहित्यकारों के सानिध्य में रचनाएँ प्रस्तुत करने के अवसर मिले.

प्रथम बार आकाशवाणी रायपुर से १९७६ में सस्वर गीतों का प्रसारण हुआ जो १९८७ तक अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर रहा.

१९८१ में आकाशवाणी रायपुर से "कवि कंठ" कार्यक्रम का प्रथम रचनाकर प्रस्तोता रहा.


वर्ष २००१ में छत्तीसगढ़ी गीत एवम कविता का प्रथम संग्रह "अंचरा के मया" प्रकाशित हुआ.


प्रकाशनाधीन छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह- "मोर गाँव कहाँ सोरियावत हंव"
"सुखवन्तिन" - छत्तीसगढ़ी लोक कथा
"तेरे लिए मै गाऊंगा गीत जिंदगी"- हिन्दी काव्य संग्रह

समाज के एक सजग प्रहरी की तरह हिन्दी एवम छत्तीसगढ़ी की रचनाओं के माध्यम से अलख जाने की मंशा संजोये सामाजिक जीवन के श्रेष्ठ मूल्यों के संरक्षण, लोक संस्कृति, लोक मर्यादा और आंचलिक एवम राष्ट्रीय सदभावनाओं के संवर्धन की कामनाओं को अपनी नियति से जोड़े रखने का सतत अभिलाषी रहा.

आपसी स्नेह, सामाजिक समरसता के प्रबल समर्थन में कई संदेश जन रचनाओं का सार्थक सृजन हो सका है .

संभवतः इन्ही वजह से इस अदने से रचनाकार को कई साहित्य एवम कला से जुडे संस्थाओं ने अपना स्नेह और सम्मान से नवाजा है ::-. यथा.
१. तांदुला तरंग कला समिति बालोद, जिला दुर्ग
२. पैरी साहित्य समिति गरियाबंद , जिला रायपुर
३. हिन्दी साहित्य समिति मुंगेली , जिला बिलासपुर
४. समन्वय साहित्य परिवार , बिलासपुर
५. प्रांतीय यादव महासभा जिला इकाई बिलासपुर
६. बिलासा कला मंच बिलासपुर "साहित्य सम्मान"

सम्प्रति - सेवानिवृत्त उप अभियंता, जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन, अध्यक्ष प्रांतीय छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति की जिला इकाई बिलासपुर , अध्यक्ष चंदेला नगर विकास समिति बिलासपुर

वर्तमान पता - एम.आई.जी. -ए/8 चंदेला नगर, रिंग रोड क्र 2 बिलासपुर मोबाइल नंबर-09755141676

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साहित्य शिल्पी के कुछ प्रमुख रचनाकार

अजय कुमार अजय अक़्स
अखिलेश अजय यादव
अदिति मजुमदार डॉ॰ अंजना संधीर
अनवार आलम अनिल कान्त
डॉ. अनिल चड्डा अनिल पाराशर
अनिल पुसदकर अनुपमा चौहान
अब्दुल रहमान मन्सूर अभिषेक “कार्टूनिस्ट"
अभिषेक सागर अम्बरीष श्रीवास्तव
अमन दलाल अमित कुमार राणा
अमितोष मिश्रा डॉ० अरविन्द मिश्र
अलबेला खत्री अवनीश एस. तिवारी
अविनाश वाचस्पति प्रो. अश्विनी केशरवानी
डॉ. अ. कीर्तिवर्धन
डॉ० सुरेश तिवारी सुरेश शर्मा
संदीप कुमार सीमा सचदेव
संगीता पुरी सुमन बाजपेयी
संजीव सुशील कुमार
समीर लाल संजीव वर्मा "सलिल"
सुधा भार्गव डॉ० सुधा ओम ढींगरा
सत्यजीत भट्टाचार्य सुभाष नीरव
सतपाल ख्याल सुशील छोक्कर
सुनीता चोटिया सुषमा गर्ग
संजीव तिवारी सूरज प्रकाश
स.र. हरनोट सुदर्शन प्रियदर्शनी
सनत कुमार जैन सुमित सिंह
सुमन 'मीत' सुषमा झा
सुलभ 'सतरंगी' डॉ० सुभाष राय
डॉ० मोहम्मद साजिद खान संगीता मनराल
संजय जनांगल सरोज त्यागी

स्लाईड शो...

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साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें। sahityashilpi@gmail.com आईये कारवां बनायें..