१२ मार्च, १९५१ को कानपुर के गाँव नौगवां (गौतम) में जन्मे वरिष्ठ कथाकार रूपसिंह चन्देल कानपुर विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी), पी-एच.डी. हैं। अब तक उनकी ३८ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। ६ उपन्यास जिसमें से 'रमला बहू', 'पाथरटीला', 'नटसार' और 'शहर गवाह है' - अधिक चर्चित रहे हैं, १० कहानी संग्रह, ३ किशोर उपन्यास, १० बाल कहानी संग्रह, २ लघु-कहानी संग्रह, यात्रा संस्मरण, आलोचना, अपराध विज्ञान, २ संपादित पुस्तकें सम्मिलित हैं। इनके अतिरिक्त बहुचर्चित पुस्तक 'दॉस्तोएव्स्की के प्रेम' (जीवनी) संवाद प्रकाशन, मेरठ से प्रकाशित से प्रकाशित हुई है।उन्होंने रूसी लेखक लियो तोल्स्तोय के अंतिम उपन्यास 'हाजी मुराद' का हिन्दी में पहली बार अनुवाद किया है जो २००८ में 'संवाद प्रकाशन' मेरठ से प्रकाशित हुआ है।सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन
दो चिट्ठे- रचना समय और वातायन।

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पंजाब के जालंधर शहर में जन्मी डा. सुधा ढींगरा हिन्दी और पंजाबी की सम्मानित लेखिका हैं। वर्तमान में वे अमेरिका में रहकर हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु कार्यरत हैं।
प्रकाशित साहित्य--मेरा दावा है (काव्य संग्रह-अमेरिका के कवियों का संपादन ) ,तलाश पहचान की (काव्य संग्रह ) ,परिक्रमा (पंजाबी से अनुवादित हिन्दी उपन्यास), वसूली (कथा- संग्रह हिन्दी एवं पंजाबी ), सफर यादों का (काव्य संग्रह हिन्दी एवं पंजाबी ), माँ ने कहा था (काव्य सी .डी ), पैरां दे पड़ाह , (पंजाबी में काव्य संग्रह ), संदली बूआ (पंजाबी में संस्मरण ), १२ प्रवासी संग्रहों में कविताएँ, कहानियाँ प्रकाशित।
विशेष--विभौम एंटर प्राईसिस की अध्यक्ष, हिन्दी चेतना (उत्तरी अमेरिका की त्रैमासिक पत्रिका) की सह- संपादक। हिन्दी विकास मंडल (नार्थ कैरोलाइना) के न्यास मंडल में हैं। अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति (अमेरिका) के कवि सम्मेलनों की राष्ट्रीय संयोजक हैं। इंडिया आर्ट्स ग्रुप की स्थापना कर, अमेरिका में हिन्दी के बहुत से नाटकों का मंचन किया है। अनगिनत कवि सम्मेलनों का सफल संयोजन एवं संचालन किया है। रेडियो सबरंग ( डेनमार्क ) की संयोजक।
पुरस्कार- सम्मान-- १) अमेरिका में हिन्दी के प्रचार -प्रसार एवं सामाजिक कार्यों के लिए वाशिंगटन डी.सी में तत्कालीन राजदूत श्री नरेश चंदर द्वारा सम्मानित। २) चतुर्थ प्रवासी हिन्दी उत्सव २००६ में ''अक्षरम प्रवासी मीडिया सम्मान.'' ३) हैरिटेज सोसाइटी नार्थ कैरोलाईना (अमेरिका ) द्वारा ''सर्वोतम कवियत्री २००६'' से सम्मानित , ४) ट्राईएंगल इंडियन कम्युनिटी, नार्थ - कैरोलाईना (अमेरिका ) द्वारा ''२००३ नागरिक अभिनन्दन ''. हिन्दी विकास मंडल , नार्थ -कैरोलाईना( अमेरिका ), हिंदू- सोसईटी , नार्थ कैरोलाईना( अमेरिका ), अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति (अमेरिका) द्वारा हिन्दी के प्रचार -प्रसार एवं सामाजिक कार्यों के लिए कई बार सम्मानित।

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दिव्या माथुर

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मूलतः फरीदाबाद, हरियाणा के निवासी दिगंबर नासवा को स्कूल, कौलेज के ज़माने से लिखने का शौक है जे अब तक बना हुआ है।

आप पेशे से चार्टेड एकाउंटेंट हैं और वर्तमान में दुबई स्थित एक कंपनी में C.F.O. के पद पर विगत ७ वर्षों से कार्यरत हैं।

पिछले कुछ वर्षों से अपने ब्लॉग "स्वप्न मेरे" पर लिखते आ रहे हैं।

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मेजर गौतम राजरिशी का जन्म १० मार्च, १९७६ को सहरसा (बिहार) में हुआ। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी व भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत वर्तमान में आप कश्मीर में पदस्थापित हैं।

गज़ल व हिन्दी-साहित्य के शौकीन गौतम राजरिशी की कई रचनायें कादम्बिनी, हंस आदि साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं।

अपने ब्लाग "पाल ले एक रोग नादाँ" के माध्यम से वे अंतर्जाल पर भी सक्रिय हैं।

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मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जन्मे अमन दलाल एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा में बी.टेक. के विद्यार्थी हैं। लेखन में बहुत अर्से से रूचि है। विद्यालयीन स्तर पर लेखन, वाद-विवाद आदि के लिये कै बार पुरुस्कृत भी हुये हैं। अंतरजाल पर भी सक्रिय हैं।

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शैफाली 'नायिका' माइक्रोबायोलॉजी में स्नातक हैं।

आपनें वेबदुनिया डॉट कॉम में तीन वर्षों तक उप-सम्पादक के पद पर कार्य किया है। आपने आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के विभिन्न कार्यक्रमों में संचालन भी किया है।

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शरद चन्द्र गौड बस्तर अंचल में अवस्थित रचनाकार हैं। आपका बस्तर क्षेत्र पर गहरा अध्ययन व शोध है।

आपकी प्रकाशित पुस्तकों में बस्तर एक खोज, बस्तर गुनगुनाते झरनों का अंचल, तांगेवाला पिशाच, बेड नं 21, पागल वैज्ञानिक आदि प्रमुख हैं। साहित्य शिल्पी के माध्यम से अंतर्जाल पर हिन्दी को समृद्ध करने के अभियान में आप सक्रिय हुए हैं।


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रीना कपिल एक प्रतिभावान संगीतकार हैं और वर्तमान में फरीदाबाद स्थित "जी.बी.एन विद्यालय" में बतौर संगीत शिक्षिका कार्यरत हैं। रीना न केवल सितार व तबले में दक्ष है अपितु पंजाबी गीतों पर उनकी पकड़ गहरी है। प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद से संगीत में प्रभाकर रीना कपिल 1988 से 1998 तक आकाशवाणी नई दिल्ली के युववाणी विभाग से भी जुडी रही हैं। रीना कपिल समय समय पर अपने कार्यक्रम विभिन्न मंचों पर प्रस्तुत करती रही हैं, यही नहीं प्रत्येक पूर्णमासी को नई दिल्ली के छतरपुर मंदिर में अपने भजनों के प्रस्तुतिकरण से वे श्रोताओं को निरंतर मंत्रमुग्ध करती रहती हैं।

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श्री राम शिवमूर्ति यादव जी समाज शास्त्र में काशी विद्यापीठ वाराणसी से स्नातकोतर हैं तथा देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में इनकी रचनायें छपती रही हैं। बेव पर इनकी रचनायें साहित्य कुंज, रचनाकार, हिन्दी नेस्ट, स्वर्गविभा, कथाव्यथा, वांग्मय पत्रिका पर उपलब्ध हैं। सामाजिक व्यवस्था एंव आरक्षण (१९९०) प्रकाशित हो चुकी है तथा लेखों का एक अन्य संग्रह प्रेस में है। भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा "ज्योतिवा फ़ुले फ़ेलोशिप सम्मान से सम्मानित तथा राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा "भारती ज्योति" से सम्मानित। सम्प्रति : उत्तर प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृति के पश्चात स्वतन्त्र लेखन व अध्ययन एंव समाज सेवा|

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रचना श्रीवास्तव का जन्म लखनऊ (यू.पी.) में हुआ। आपनें डैलास तथा भारत में बहुत सी कवि गोष्ठियों में भाग लिया है। आपने रेडियो फन एशिया, रेडियो सलाम नमस्ते (डैलस), रेडियो मनोरंजन (फ्लोरिडा), रेडियो संगीत (हियूस्टन) में कविता पाठ प्रस्तुत किये हैं। आपकी रचनायें सभी प्रमुख वेब-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं।

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मोहन राणा का जन्म 1964 में दिल्ली में हुआ। वे दिल्ली विश्वविद्यालय से मानविकी में स्नातक हैं, आजकल ब्रिटेन के बाथ शहर के निवासी हैं। उनके 6 कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।

जगह(1994), जैसे जनम कोई दरवाजा (1997), सुबह की डाक (2002), इस छोर पर (2003), पत्थर हो जाएगी नदी(2007), धूप के अँधेरे में (2008)। एक द्विभाषी संग्रह "With Eyes Closed" का प्रकाशन 2008 में हुआ है।

कवि-आलोचक नंदकिशोर आचार्य के अनुसार - हिंदी कविता की नई पीढ़ी में मोहन राणा की कविता अपने उल्लेखनीय वैशिष्टय के कारण अलग से पहचानी जाती रही है, क्योंकि उसे किसी खाते में खतियाना संभव नहीं लगता। यह कविता यदि किसी विचारात्मक खांचे में नहीं अँटती तो इसका यह अर्थ नहीं लिया जाना चाहिए कि मोहन राणा की कविता विचार से परहेज करती है – बल्कि वह यह जानती है कि कविता में विचार करने और कविता के विचार करने में क्या फर्क है। मोहन राणा के लिए काव्य रचना की प्रक्रिया अपने में एक स्वायत्त विचार प्रक्रिया भी है।

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धीरेन्द्र सिंह का जन्म १० जुलाई १९८७ को छतरपुर जिले के चंदला नाम के गाँव में हुआ था| आपने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा चंदला में ही पूरी की। वर्तमान में आप इंदौर में अभियन्त्रिकी में द्वितीय वर्ष के छात्र हैं|

कविताएँ लिखने का शौक आपको अल्पायु से ही था, किन्तु पन्नो में लिखना कक्षा नवीं से प्रारंभ किया| आप हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में रचनाएं लिखते हैं। आपका 'काफ़िर' तखल्लुस है |

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द्विजेन्द्र ‘द्विज’ का जन्म 10 अक्तूबर,1962 को हुआ। आपकी प्रकाशित कृतियाँ हैं : जन-गण-मन (ग़ज़ल संग्रह) प्रकाशन वर्ष-२००३। आपकी ग़ज़लें अनेक महत्वपूर्ण संकलनों का भी हिस्सा हैं।

आप की ग़ज़लें देश की सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित व आकाशवाणी से प्रसारित होती रही हैं। आप अंतर्जाल पर भी सक्रिय हैं।

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तेजेन्द्र शर्मा का जन्म 21 अक्टूबर 1952 को पंजाब के शहर जगरांव में हुआ। तेजेन्द्र शर्मा की स्कूली पढाई दिल्ली के अंधा मुगल क्षेत्र के सरकारी स्कूल में हुई. आपनें दिल्ली विश्विद्यालय से बी.ए. (ऑनर्स) अंग्रेज़ी, एम.ए. अंग्रेज़ी, एवं कम्पयूटर कार्य में डिप्लोमा किया है।

आपकी प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ हैं - कहानी संग्रह : काला सागर (1990), ढिबरी टाईट (1994 - पुरस्कृत), देह की कीमत (1999), ये क्या हो गया ? (2003) पंजाबी में अनूदित कहानी संग्रह - ढिम्बरी टाईट। नेपाली मे अनूदित कहानी संग्रह - पासपोर्ट का रंगहरू, उर्दू मे अनूदित कहानी संग्रह - ईटो का जंगल।

आपकी भारत एवं इंगलैंड की लगभग सभी पत्र पत्रिकाओं में कहानियां, लेख, समीक्षाएं, कविताएं एवं गज़लें प्रकाशित हुई हैं साथ ही आपकी कहानियों का पंजाबी, मराठी, गुजराती, उडिया और अंग्रेज़ी में अनुवाद प्रकाशित हुआ है।

आपने दूरदर्शन के लिये शांति सीरियल का लेखन भी किया है। आपने अन्नु कपूर द्वारा निर्देशित फिल्म अभय में नाना पाटेकर के साथ अभिनय भी किया है। आपकी अन्य गतिविधियों में बीबीसी लंदन, ऑल इंडिया रेडियो, व दूरदर्शन से कार्यक्रमों की प्रस्तुति, अनेकों नाटकों में प्रतिभागिता एवं समाचार वाचन प्रमुख हैं।

आपको अनेकों पुरस्कार व सम्मान प्राप्त हैं जिनमें ढिबरी टाइट के लिये महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी पुरस्कार - 1995 प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के हाथों, सहयोग फौन्देशन का युवा साहित्यकार पुरस्कार – 1998, सुपथगा सम्मान – 1987, कृति यूके द्वारा वर्ष 2002 के लिये बेघर आंखें को सर्वश्रेष्ठ कहानी का पुरस्कार आदि प्रमुख हैं।

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अनिल पाराशर उर्फ़ मासूम शायर का जन्म 20 मई 1961 को भिलाई में हुआ। कला के प्रति इनका रुझान इनकी कविताओं में झलकता है। आजकल ये दिल्ली में बिड़ला ग्रूप में डेप्युटी मॅनेजर के पद पर कार्यरत है।
पिछ्ले तीस सालों से काव्य में रूचि रखते हैं और कई मंचों पर अपनी कविताएँ सुना चुके हैं। इनकी कविताएँ रेडिओ के विभिन्न कार्यक्रमों में आती रहती हैं।


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साहित्य शिल्पी के कुछ प्रमुख रचनाकार

अजय कुमार अजय अक़्स
अखिलेश अजय यादव
अदिति मजुमदार डॉ॰ अंजना संधीर
अनवार आलम अनिल कान्त
डॉ. अनिल चड्डा अनिल पाराशर
अनिल पुसदकर अनुपमा चौहान
अब्दुल रहमान मन्सूर अभिषेक “कार्टूनिस्ट"
अभिषेक सागर अम्बरीष श्रीवास्तव
अमन दलाल अमित कुमार राणा
अमितोष मिश्रा डॉ० अरविन्द मिश्र
अलबेला खत्री अवनीश एस. तिवारी
अविनाश वाचस्पति प्रो. अश्विनी केशरवानी
डॉ. अ. कीर्तिवर्धन
डॉ० सुरेश तिवारी सुरेश शर्मा
संदीप कुमार सीमा सचदेव
संगीता पुरी सुमन बाजपेयी
संजीव सुशील कुमार
समीर लाल संजीव वर्मा "सलिल"
सुधा भार्गव डॉ० सुधा ओम ढींगरा
सत्यजीत भट्टाचार्य सुभाष नीरव
सतपाल ख्याल सुशील छोक्कर
सुनीता चोटिया सुषमा गर्ग
संजीव तिवारी सूरज प्रकाश
स.र. हरनोट सुदर्शन प्रियदर्शनी
सनत कुमार जैन सुमित सिंह
सुमन 'मीत' सुषमा झा
सुलभ 'सतरंगी' डॉ० सुभाष राय
डॉ० मोहम्मद साजिद खान संगीता मनराल
संजय जनांगल सरोज त्यागी

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साक्षात्कार पढ़ें... पुस्तक चर्चा...

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साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें। sahityashilpi@gmail.com आईये कारवां बनायें..