प्रख्यात कवि और गीतकार स्व० पं० नरेन्द्र शर्मा का पूर्ण परिचय शीघ्र प्रकाशित...

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त्रिजुगी कौशिक वरिष्ठ कवि हैं। वर्तमान में आप जन संपर्क विभाग में कार्यरत तथा रायपुर में अवस्थित हैं।

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आयु: ४७ वर्ष

पेशा: दैनिक हिंदुस्तान रांची, में १० वर्षों से बतौर कार्टूनिस्ट कार्यरत!
अन्य जानकारियां- कार्य अनुभव २५ वर्षों का! अबतक १५००० हजार से भी अधिक कार्टून प्रकाशित!

कुछ प्रमुख पत्र-पत्रिकाएं जहाँ कार्टून प्रकाशित हुए या हो रहे हैं:
दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, रांची एक्सप्रेस, सन्मार्ग, अपनी रांची, देशप्राण, सरिता, मेरी सहेली, वामा, गृह सहेली, बिंदिया, प्रथम प्रवक्ता, नूतन कहानियाँ, सच्ची कहानियां, सरस सलिल, दी पब्लिकअजेंडा, राज माया, संपादक, नंदन, बाल भारती, बाल हंस, बाल भाष्कर, दीवाना तेज साप्ताहिक, लोटपोट, मधुमुस्कान, आनंद डाइजेस्ट, मेला, माधुरी, आदि.....

ब्लोग- http://sureshcartoonist.blogspot.com

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अंतर्राष्ट्रीय संबन्धों पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम.ए. कर रहे संदीप कुमार को अध्ययन के साथ-साथ सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का भी शौक है।

अपनी भावनाओं को आप प्राय: कहानी और कविताओं के माध्यम से कागज पर उतारते रहते हैं।

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श्री शरद कोकास एक जाने-माने साहित्यकार तथा समालोचक हैं। वर्तमान में आप रायपुर (छत्तीसगढ़ में अवस्थित हैं।

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30 जून, 1967 को रामपुर (उ०प्र०) में जन्मे और हाथरस में पले-बढ़े शक्ति प्रकाश वर्तमान में आगरा में रेलवे में अवर अभियंता के रूप में कार्यरत हैं। हास्य-व्यंग्य में आपकी विशेष रूचि है। दो व्यंग्य-संग्रह प्रकाशित भी करा चुके हैं। इसके अतिरिक्त कहानियाँ, कवितायें और गज़लें भी लिखते हैं।

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साहित्य शिल्पी बृजेश शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर फिरोजाबाद में १० नवम्बर १९८२ को हुआ। १४ साल तक का जीवन वही गुजारा और ९ वी तक की पढ़ाई भी वही हुई, फिर वे दिल्ली आ गये और आज काल एक इंटरनेशनल बी पी ओ में एकज्युकेटिव के पद पर हैं। साहित्य शिल्पी पर इनकी सम्पूर्ण रचनाओं के लिए यहाँ चटखा लगाए।
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हिंदी और संस्कृत में स्नातकोत्तर शशि पाधा १९६८ में जम्मू कश्मीर विश्वविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ महिला स्नातक रहीं हैं। इसके अतिरिक्त सर्वश्रेष्ठ सितार वादन के लिये भी आप सम्मानित हो चुकीं हैं।

२००२ में अमेरिका जाने से पूर्व आप भारत में एक रेडियो कलाकार के रूप में कई नाटकों और विचार-गोष्ठियों में भी सम्मिलित रहीं हैं। आपकी रचनायें भी समय-समय पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं। अमेरिका में आप नार्थ कैरोलिना विश्वविद्यालय में हिंदी अध्यापन से जुड़ गईं।

अब तक आपके दो काव्य-संकलन “पहली किरण” और “मानस-मन्थन” प्रकाशित हो चुके हैं और एक अन्य प्रकाशनाधीन है। पिछले पाँच वर्षों से आप विभिन्न जाल-पत्रिकाओं से भी प्रकाशित हो रहीं हैं।

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प्रकाश कुमार सिंह "अर्श" मूलत: बिहार के भोजपुर जिले के निवासी हैं और दिल्ली से एम.बी.ए. करने के उपरांत वर्तमान में वरिष्ठ प्रबंधक के तौर पर एक संस्थान में कार्यरत हैं।

आप पिछले लगभग दस सालों से हिंदी में गज़लें कह रहे हैं जो विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित भी होती रही हैं।

अपने ब्लाग "अर्श" के माध्यम से आप अंतर्जाल पर भी सक्रिय हैं।

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दीपक 'बेदिल' का मूल नाम दीपक पँवार है| आप नई दिल्ली स्थित एशियाड गाँव के नज़दीक शाहपुर जाट के निवासी हैं| आप मुख्यत: गीत, गज़ल आदि लिखते हैं|


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भारतेन्दु कालीन साहित्यकार श्री गोविं‍द साव के छठवी पीढी के वंशज के रूप में १८ अगस्त, १९५८ को सांस्कृतिक तीर्थ शिवरीनारायण में जन्मे अश्विनी केशरवानी वर्तमान में शासकीय महाविद्यालय, चांपा (छत्तीसगढ़) में प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं।

वे देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में तीन दशक से निबंध, रिपोर्ताज, संस्मरण एवं समीक्षा आदि लिख रहे हैं एवं आकाशवाणी के रायपुर एवं लासपुर केन्द्रों से उनकी अन्यान्य वार्ताओं का प्रसारण भी हुआ है। वे कई पत्रिकाओं के संपादन से भी सम्बद्ध हैं।

अब तक उनकी "पीथमपुर के कालेश्वरनाथ" तथा "शिवरीनारायण : देवालय एवं परम्पराएं" नामक पुस्तकें प्रकाशित हैं और कुछ अन्य शीघ्र प्रकाश्य हैं।

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विश्वरंजन का जन्म 1 अप्रैल 1952 को गया बिहार में हुआ। आपने पटना विश्वविद्यालय से बी.ए ऑनर्स की डिग्री हासिल की जिसके पश्चात आपका चयन भारतीय पुलिस सेवा में हो गया। आप मशहूर शायर फ़िराक गोरखपुरी के नाती हैं। आप देश की लगभग सभी पत्र-पत्रिकाओं में समादृत हैं। आपकी प्रकाशित कृतियाँ हैं – स्वप्न का होना बेहद ज़रूरी है (काव्य संग्रह), एक नयी पूरी सुबह (एकाग्र)। आपने अनेक कविताओं का अंग्रेजी, बांग्ला व तेलुगु से अनुवाद भी किया है। वर्तमान में आप छतीसगढ के पुलिस महानिदेशक हैं।

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युवा साहित्यकार के रूप में ख्याति प्राप्त डॉ. वीरेन्द्र सिंह यादव ने दलित विमर्श के क्षेत्र में ‘दलित विकासवाद’ की अवधारणा को स्थापित कर उनके सामाजिक,आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त किया है। आपके दो सौ पचास से अधिक लेखों का प्रकाशन राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में हो चुका है। दलित विमर्श, स्त्री विमर्श, राष्ट्रभाषा हिन्दी में अनेक पुस्तकों की रचना कर चुके डा. वीरेन्द्र ने विश्व की ज्वलंत समस्या पर्यावरण को शोधपरक ढंग से प्रस्तुत किया है। राष्ट्रभाषा महासंघ मुम्बई, राजमहल चौक कवर्धा द्वारा स्व0 श्री हरि ठाकुर स्मृति पुरस्कार, बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर फेलोशिप सम्मान 2006, साहित्य वारिधि मानदोपाधि एवं निराला सम्मान 2008 सहित अनेक सम्मानो से उन्हें अलंकृत किया जा चुका है। वर्तमान में आप भारतीय उच्च शिक्षा अध्ययन संस्थान राष्ट्रपति निवास, शिमला (हि0प्र0) में नई आर्थिक नीति एवं दलितों के समक्ष चुनौतियाँ (2008-11) विषय पर तीन वर्ष के लिए एसोसियेट हैं।

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महावीर अग्रवाल का जन्म ५ मई १९४६ छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का गाँव `कुरुद' में हुआ। आपने एम.काम., पीएच.डी तक की शिक्षा प्राप्त की है।

आपकी प्रकाशित कृतियाँ हैं :-
लाल बत्ती जल रही है (व्यंग्य संग्रह), गधे पर सवार इक्कीसवीं सदी (व्यंग्य संग्रह), श्वेत कपोत की वसीयत (पंडित नेहरू पर), कुष्ठ और सामाजिक चेतना, न्याय के लिए लड़ता हुआ जटायु, आखिर कब तक (सात नाटकों का संकलन), काशी का जुलाहा (कबीर पर एक पूर्ण नाटक), छत्तीसगढ़ी लोक नाट्य: नाचा (शोधग्रंथ), तीजन की कहानी (नव साक्षरों के लिए), पंडवानी की खुशबू: ऋतु वर्मा , हबीब तनवीर का रंग संसार।
आपके द्वारा सम्पादित पुस्तकें हैं:- शमशेर: कवि से बड़े आदमी, नागार्जुन: विचार सेतु , त्रिलोचन:किंवदंती पुरुष, मुकुटधर पाण्डेय: व्यक्ति एवं रचना, कबीर तेरे रुप अनेक, संवेदना के धरातल, निरक्षर व्यक्ति क्यों पढ़ें, सूत्रधार (बीस नाटकों का संकलन), लोक संस्कृति: आयाम एवं परिप्रेक्ष्य, श्री व्यंग्य सप्तक (दो खण्डों में)।

आप साहित्यिक पत्रिका `सापेक्ष' का २५ वर्षों से संपादन कर रहे हैं।

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किरण सिन्धु, उत्तर प्रदेश की मूल निवासी हैं। आपकी शिक्षा झारखण्ड में तथा विवाह बिहार में हुआ। वर्तमान में आप मुंबई में अवस्थित हैं। आपको परिवार और परिवेश में बचपन से ही साहित्य प्रेम का भरपूर अवसर प्राप्त हुआ। श्रधेय गुरुजनों की कृपा से जो भी ज्ञानार्जन हुआ उसके सहारे अध्यापन के क्षेत्र में २५ वर्षों तक सुदृढ़ रूप से खड़ी रही। हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति किशोरावस्था से ही प्रेम रहा है।

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उदयेश रवि का जन्म झारखंड में हुआ। आप प्राणी विज्ञान में स्नातक हैं। वर्तमान में आप एक प्रतिष्ठित आई. टी पत्रिका में कार्यकारी संपादक के तौर पर कार्य कर रहे हैं, साथ ही स्वतंत्र पत्रकारिता भी कर रहे हैं।

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आशीष रस्तोगी ने बी.टेक., एमबीए किया है और इन दिनों बहुराष्ट्रीय कम्पनी एचसीएल के मैनेजिंग विभाग में नोएडा में कार्यरत हैं।

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20 मई 1981 को पेन्ड्रा (छत्तीसगढ़) में जन्मे अमितोष मिश्रा ने रायपुर से बी.ई.(सूचना प्रौधोगिकी) तथा पोलीटेकनिक कॉलेज अम्बिकापुर से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है और वर्तमान में मुंबई में एक फ्रेंच मल्टी नेशनल कंपनी में सॉफ्टवेर इंजिनियर के पद पर कार्यरत है|

लेखन मुख्यतः ग़ज़लों में उनकी विशेष रूचि है| ये अंतर्जाल पर भी सक्रिय हैं और अपना एक ब्लाग "Amitosh The Shayar" चलाते हैं।

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२८ नवम्बर, १९५१ को जिला आज़मगढ़ (उत्तर प्रदेश) में जन्मे विभूति नारायण राय १९७५ बैच के यू.पी.कैडर के आई.पी.एस. अधिकारी हैं।

विशिष्ट सेवा के लिये राष्ट्रपति पुरुस्कार तथा पुलिस मैडल से सम्मानित श्री राय एक संवेदनशील पुलिस अधिकारी के साथ-साथ एक उच्चकोटि के कथाकार के रूप में भी जाने जाते रहे हैं। प्रस्तुत उपन्यास "तबादला" पर उन्हें अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान प्राप्त हुआ है। उनका उपन्यास "शहर में कर्फ्यू" हिंदी के अलावा अंग्रेजी, पंजाबी, उर्दू, बांग्ला, मराठी आदि में भी अनूदित हो चुका है। उनके एक अन्य उपन्यास "किस्सा लोकतंत्र" के लिये उन्हें उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का भी सम्मान प्राप्त हुआ है। उपन्यासों के अलावा उनका व्यंग्य-संग्रह "एक छात्र-नेता का रोजनामचा" भी बहुत लोकप्रिय है।

वर्तमान में आप महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति हैं।

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सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, भोपाल द्वारा संचालित एक अस्पताल में हृदय विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत डॉ० ज्ञान चतुर्वेदी हिन्दी के जाने-माने व्यंग्यकार हैं।

अब तक इनके कई उपन्यास, हास्य-व्यंग्य संग्रह तथा कहानियाँ प्रकाशित हो कर लोकप्रिय हो चुके हैं।

2002 में अपने उपन्यास बारामासी के लिए आपको इंदु शर्मा कथा सम्मान से सम्मानित किया गया है।

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23 जनवरी 1960 को नगीना, मेवात में जन्मे भगवानदास मोरवाल नें हिन्दी कथा जगत में महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। आपनें राजस्थान विश्वविद्यालय से एम.ए. किया साथ ही आपको पत्रकारिता में डिप्लोमा भी हासिल है। आपके प्रकाशित उपन्यास हैं - रेत, काला पहाड़ एवं बाबल तेरा देस में। आपके चार कहानी संग्रह, एक कविता संग्रह और कई संपादित पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं। आपके लेखन में मेवात क्षेत्र की ग्रामीण समस्याएं उभर कर सामने आती हैं।

भगवानदास मोरवाल को उपन्यास रेत के लिये ही इस वर्ष के दो प्रमुख सम्मान प्राप्त हुए हैं। पहला है अंतरराष्ट्रीय इंदुशर्मा कथा सम्मान जो कि कथा. यू. के द्वारा लंदन में प्रदान किया गया। दूसरा है - जे. सी जोशी स्मृति शब्द साधक ज्यूरी सम्मान। इस सम्मान को घोषित करने के लिये ज्यूरी में डॉ. नामवर सिंह, डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी तथा राजेन्द्र यादव थे।


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2 अक्टूबर, 1974 को पंजाब के अबोहर मे जन्मी सीमा सचदेव पेशे से हिन्दी-अध्यापिका हैं। इनकी कई रचनाये जैसे- विभिन्न अंतर्जाल पत्रिकाओ मे प्रकाशित हैं। "मेरी आवाज़ भाग-१,२", "मानस की पीड़ा", "सन्जीवनी", "आओ सुनाऊं एक कहानी", "नन्ही कलियाँ", "आओ गाएं" नामक रचना-संकलन ई-पुस्तक के रूप में प्रकाशित हैं।

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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' नें नागरिक अभियंत्रण में त्रिवर्षीय डिप्लोमा. बी.ई., एम.आई.ई., अर्थशास्त्र तथा दर्शनशास्त्र में एम.ऐ., एल.एल.बी., विशारद, पत्रकारिता में डिप्लोमा, कंप्युटर ऍप्लिकेशन में डिप्लोमा किया है।
आपकी प्रथम प्रकाशित कृति 'कलम के देव' भक्ति गीत संग्रह है। 'लोकतंत्र का मकबरा' तथा 'मीत मेरे' आपकी छंद मुक्त कविताओं के संग्रह हैं। आपकी चौथी प्रकाशित कृति है 'भूकंप के साथ जीना सीखें'। आपने निर्माण के नूपुर, नींव के पत्थर, राम नाम सुखदाई, तिनका-तिनका नीड़, सौरभ:, यदा-कदा, द्वार खड़े इतिहास के, काव्य मन्दाकिनी २००८ आदि पुस्तकों के साथ साथ अनेक पत्रिकाओं व स्मारिकाओं का भी संपादन किया है।
आपको देश-विदेश में १२ राज्यों की ५० सस्थाओं ने ७० सम्मानों से सम्मानित किया जिनमें प्रमुख हैं : आचार्य, २०वीं शताब्दी रत्न, सरस्वती रत्न, संपादक रत्न, विज्ञान रत्न, शारदा सुत, श्रेष्ठ गीतकार, भाषा भूषण, चित्रांश गौरव, साहित्य गौरव, साहित्य वारिधि, साहित्य शिरोमणि, काव्य श्री, मानसरोवर साहित्य सम्मान, पाथेय सम्मान, वृक्ष मित्र सम्मान, आदि।

वर्तमान में आप अनुविभागीय अधिकारी मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग के रूप में कार्यरत हैं।

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संगीता पुरी का जन्म 19 दिसम्‍बर 1963 को झारखंड के बोकारो जिला अंतर्गत ग्राम पेटरवार में हुआ। रांची विश्‍वविद्यालय से अर्थशास्‍त्र में 1984 में स्‍नातकोत्‍तर की डिग्री ली।

उसके बाद झुकाव अपने पिताजी श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा विकसित की गयी ज्‍योतिष की एक नई शाखा गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष की ओर हुआ और सब कुछ छोडकर इसी के अध्‍ययन मनन में अपना जीवन समर्पित कर दिया। गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष पर आधारित अपना साफ्टवेयर भी वे बना चुकी हैं।

सितम्‍बर 2007 से ही ज्‍योतिष पर आधारित अपने अनुभवों के साथ ब्‍लागिंग की दुनिया में हैं। अनेक पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन करती आ रही हैं। ज्‍योतिष पर आधारित एक पुस्‍तक 'गत्‍यात्‍मक दशा पद्धति: ग्रहों का प्रभाव' 1996 में प्रकाशित हो चुकी है।


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<span title=साहित्य शिल्पी" रचनाकार परिचय:-

सुमन बाजपेयी का जन्म दिल्ली में हुआ। यहीं एम.ए. हिन्दी आनर्स व पत्रकारिता का अध्ययन किया।
१२ साल की उम्र से ही कवितायें लिखना आरंभ कर दिया था। कालेज में पढ़ते हुये ही इनकी कहानी "अपना घर" युववाणी से प्रसारित हुई। कैरियर का आरंभ ’चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट’ से किया तथा यहीं से बाल-लेखन की भी शुरुआत हुई। तत्पश्चात ’जागरण सखी’, ’मेरी संगिनी’ और ’फोर्थ डी वुमन’ नामक पत्रिकाओं में काम किया।

पिछले २७ वर्षों से कहानी, कविता व महिला विषयों तथा बाल-लेखन में संलग्न। ’खाली कलश’, ’ठोस धरती का विश्वास’ और ’अगिनदान’ नामक कहानी-संग्रहों समेत ३०० से अधिक कहानियाँ व २०० से अधिक लेख प्रकाशित। २५ अंग्रेजी पुस्तकों का हिन्दी में अनुवाद भी कर चुकीं हैं। पैरेंटिंग पर दो किताबें शीघ्र प्रकाश्य हैं।

रचनाकार परिचय:-

श्री एस.आर. हरनोट का जन्म जनवरी, 1955 में हिमाचल प्रदेश के शिमला जिल की पिछड़ी पंचायत व गाँव चनावग में हुआ। बी.ए. ऑनर्ज़ एम.ए.(हिन्दी), पत्रकारिता, लोक-सम्पर्क एवं प्रचार-प्रसार में उपाधि पत्र प्राप्त करने वाले श्री हरनोट प्रदेश तथा देश से प्रकाशित होने वाले हिन्दी के समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में इतिहास, संस्कृति, लोक जीवन और विविध विषयों पर नियमित लेखन करते रहे हैं। इनकी कहानियाँ कई संपादित संग्रहों में शामिल हो चुकी हैं तथा अंग्रेजी, मराठी, कन्नड़, पंजाबी और गुजराती, तेलगू सहित कई अन्य भाषाओं में इनकी कहानियों के अनुवाद भी प्रकाशित हुये हैं। अब तक इनके कई कहानी संग्रह, "हिडिम्ब" नामक उपन्यास, हिमाचल प्रदेश के मंदिरों व लोक-कथाओं पर एक शोध तथा एक यात्रा-संस्मरण प्रकाशित हो चुके हैं।

"दारोश तथा अन्य कहानियाँ" कहानी-संग्रह के लिये इन्हें २००३ का अंतर्राष्ट्रीय इंदु-शर्मा कथा सम्मान तथा २००७ में हिमाचल राज्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। इसके अतिरिक्त इन्हें अखिल भारतीय भारतेन्दु हरिश्चन्द्र एवार्ड, हिमाचल गौरव सम्मान व हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा साहित्य सम्मान सहित कई अन्य सम्मान और पुरुस्कार भी मिल चुके हैं।

वर्तमान में आप हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम में अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।


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रचनाकार परिचय:-

10 दिसम्बर, 1944 को चेन्नई में जन्मी चित्रा मुद्गल वर्तमान हिन्दी साहित्य में एक सम्मानित नाम हैं। मुंबई से हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर चित्रा जी छात्र जीवन से ही ट्रेड यूनियन से जुड़ कर शोषितों के लिये कार्यरत रही हैं।
अमृतलाल नागर और प्रेमचन्द से प्रभावित चित्रा जी को लिखने की प्रेरणा मैक्सिम गोर्की के प्रसिद्ध उपन्यास "माँ" को पढ़ने के बाद मिली। अब तक वे कई लघुकथायें और चार उपन्यास - "आवाँ", "गिलिगद्दू", "एक जमीन अपनी" व "माधवी कन्नगी" लिख चुकीं हैं। इसके अतिरिक्त उनके बाल-कथाओं के पाँच संग्रह भी प्रकाशित हैं।
चित्रा मुद्गल को विभिन्न पुरुस्कारों से सम्मानित किया गया है जिनमें "आवाँ" के लिये २००० का इंदु शर्मा कथा सम्मान तथा २००१-०२ का उत्तरप्रदेश साहित्य भूषण प्रमुख हैं।
आप समाज के पिछड़े वर्गों को जागृत करने के लिये एक सामालिक संस्था "समन्वय" भी चला रही हैं। वे "स्त्री-शक्ति" तथा महिला-मंच से भी जुड़ी हुई हैं।

रचनाकार परिचय:-

मनोज रूपड़ा एक सुपरिचित कथाकार हैं। अपनी पंद्रह वर्ष से भी अधिक के साहित्यिक जीवन में हालाँकि संख्या के हिसाब से बहुत कम लिखा है परंतु इतनी रचनायें भी अपनी उत्कृष्टता के चलते उन्हें एक सशक्त रचनाकार साबित करने में सक्षम हैं। अपनी पुस्तक "दफ़न और अन्य कहानियाँ" के लिये इंदु शर्मा कथा सम्मान प्राप्त करने वाले मनोज जी के विषय में अधिक जानने के लिये आप प्रसिद्ध कथाकार सूरजप्रकाश जी का संस्मरण भी पढ़ सकते हैं।

रचनाकार परिचय:-

संजीव हिन्दी कथा जगत में एक सुपरिचित नाम हैं। 1947 में सुल्तानपुर (उत्तरप्रदेश) में जन्मे संजीव की शिक्षा दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई।संप्रति आप इंडियन आयरन एंड स्टील कं., कुल्टी के केमिस्ट इंचार्ज के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृति के पश्चात "अक्षर पर्व" (रायपुर) का संपादन कर रहे हैं।

इनके अब तक दस कहानी संग्रह तथा आठ उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। एक उपन्यास "सावधान नीचे आग है" के एक अंश पर "काला हीरा"नाम से एक टेलीफिल्म भी बन चुकी है।

इन्हें प्राप्त पुरुस्कारों व सम्मानों में प्रमुख हैं: सारिका सर्व भाषा कहानी प्रतियोगिता (१९८०), आनंद सागर कथा क्रम सम्मान (१९९७) तथा इंदु शर्मा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान (२००१)

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श्री अखिलेश का जन्म 1960 में सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) के बादीपुर नामक गाँव में हुआ।
वर्तमान में "तद्भव" के संपादन एवं संचालन में संलग्न अखिलेश जी की "आदमी नहीं टूटता", "मुक्ति और शापग्रस्त" (कहानी संग्रह) तथा "अन्वेषण" (उपन्यास) आदि पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। कई कहानियों का मंचन और अनुवाद भी आपने किया है। तद्भव के अतिरिक्त "वर्तमान साहित्य" और "अतएव" के सम्पादन से भी आप जुड़े रहे हैं।
सम्मान : श्रीकांत वर्मा पुरस्कार, परिचय सम्मान, बालकृष्ण शर्मा नवीन पुरस्कार, वनमाली कथा सम्मान तथा इंदु शर्मा कथा सम्मान


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रचनाकार परिचय:-

गीतांजलि श्री का जन्म १९५७ में हुआ। उत्तर प्रदेश में पली-बढ़ी गीतांजलि जी वर्तमान में हिन्दी की सुपरिचित कथाकार हैं। "हंस" में प्रकाशित अपनी पहली कहानी बेल-पत्र (१९८७) से अब तक वे अपनी विशेष लेखन-शैली के लिये जानी जाती हैं। इनके उपन्यास "माई" ने इन्हें साहित्यिक क्षेत्र में एक मुकाम दिलाया। इस उपन्यास का अंग्रेजी के अलावा रूसी और कोरियाई भाषा में अनुवाद भी प्रकाशित हो चुका है। इसके अतिरिक्त हमारा शहर उस बरस (उपन्यास), तिरोहित, वैराग्य (कहानी) आदि इनकी प्रमुख रचनायें हैं।
इंदु शर्मा कथा सम्मान के अतिरिक्त इन्हें "माई" के लिये २००१ के Crossword Book Award से भी सम्मानित किया गया है। आप संस्कृति मंत्रालय और जापान फाउन्डेशन में फैलो भी रह चुकी हैं।

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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद में एक गांव पिपनार में 1958 में जन्म। स्थानीय कस्बे के माध्यमिक विद्यालय में इंटरमीडियेट तक की शिक्षा पूरी करने के बाद देवेद्र बनारस चले गये। उदय प्रताप कालेज, वाराणसी से बी.ए. पूरी करने के बाद हिंदी में एम.ए. करने हेतु देवेद्र ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया।
रात-रात भर जागकर दीवारों पर नारे लिखने और पोस्टर चिपकाने के रोचक और रोमांचक अनुभवों के बीच ही देवेद्र की साहित्यिक, सांस्कृतिक रुचि और सक्रियता बढ़ी।
इसी बीच देवेद्र ने हिन्दी के प्रसिद्ध कथाकार काशीनाथ सिंह के साथ "नक्सलवाड़ी आंदोलन और समकालीन हिन्दी कविता" विषय पर शोध कार्य शुरू कर दिया। देवेद्र के "सुपरवाइजर" को शोध जैसे उबाऊ और नीरस काम में कोई विशेष दिलचस्पी न थी। प्राय: हर शाम गुरु और शिष्य साथ साथ `अस्सी' जाया करते थे। उन दिनों काशीनाथ सिंह "सदी का सबसे बड़ा आदमी" संग्रह की कहानियां लिख रहे थे। देवेद्र उन कहानियों का `रफ' और `फाइनल' और फिर प्रकाशित रूप देखा करते थे। तभी उन्होंने अपनी पहली कहानी "शहर कोतवाल की कविता" लिखी।
देवेद्र को इंदु शर्मा कथा सम्मान के अलावा 1999 में उ.प्र.सरकार का यशपाल पुरस्कार मिला है।


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रचनाकार परिचय:-

1956 में जन्मे धीरेद्र अस्थाना गढ़वाल विश्वविद्यालय के स्नातक हैं और उन्होंने 18- 19 बरस की उम्र से लिखी अपनी शुरुआती कहानियों से ही अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी। लोग हाशिये पर, आदमी खोर, मुहिम, विचित्र देश की प्रेम कथा, जो मारे जायेंगे, उस रात की गंध, (कहानी संग्रह) समय एक शब्द भर नहीं है, हलाहल, गुजर क्यों नहीं जाता (उपन्यास) और रूबरू, अंतर्यात्रा (साक्षात्कार) उनकी कृतियां हैं। अब तक राष्ट्रीय संस्कृति पुरस्कार, घनश्याम दास सराफ साहित्य सम्मान, मौलाना अबुल कलाम आजाद पत्रकारिता पुरस्कार और इंदु शर्मा कथा सम्मान पा चुके धीरेद्र की जीवन यात्राएं बहुत बीहड़ रही हैं। दिनमान, चौथी दुनिया, जनसत्ता, जागरण में लम्बे समय तक वरिष्ठ पदों पर रह कर पत्रकारिता के बाद अब मुंबई में सहारा समय में एसोसिएट एडिटर।


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श्री अब्दुल रहमान मन्सूर दिल्ली व आसपास में एक जाने-माने गज़लकार हैं। वर्तमान में फरीदाबाद में निवास कर रहे रहमान साहब मूलत: मुरादाबाद से सम्बद्ध हैं।

आप पिछले बीस से भी अधिक वर्षों से संज़ीदा और मज़ाहिया (हास्य) दोनों तरह की गज़लों और गीतों की रचना करते आ रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रीय व राष्ट्रीय स्तर के मुशायरों में शिरकत कर आपने सुनने वालों को अपनी खूबसूरत गज़लों और गीतों के सम्मोहन में बाँधा है।

एक बेहतरीन गज़लकार होने के साथ साथ आप गज़ल के रचना-शास्त्र (उरूज़) के उस्ताद के रूप में भी जाने जाते हैं।


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<span title=साहित्य शिल्पी" रचनाकार परिचय:-
१५ जुलाई १९८४ को फर्रुखाबाद में जन्मे प्रवीण कुमार शुक्ल रसायन विज्ञानं में स्नातक हैं और फिलहाल बवाना में नोकिया सेल्लुलर में बतौर ऍम.आई.एस. कार्यरत हैं।

कवितायें लिखने का शौक बचपन से है। कुछ ऐसा देख कर या सुन कर या महसूस कर जिससे हृदय की भावनाएं उद्वेलित होने लगें तो उन्हें शब्द देने का प्रयास करते रहते हैं।

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रचनाकार परिचय:-

10 जनवरी 1960 को चैनपुर (जिला सहरसा, बिहार) में जन्मे श्यामल सुमन में लिखने की ललक छात्र जीवन से ही रही है।

स्थानीय समाचार पत्रों सहित देश की कई पत्रिकाओं में इनकी अनेक रचनायें प्रकाशित हुई हैं। स्थानीय टी.वी. चैनल एवं रेडियो स्टेशन में भी इनके गीत, ग़ज़ल का प्रसारण हुआ है।
अंतरजाल पत्रिका साहित्य कुंज, अनुभूति, हिन्दी नेस्ट, कृत्या आदि में भी इनकी अनेक रचनाएँ प्रकाशित हैं।

इनका एक गीत ग़ज़ल संकलन शीघ्र प्रकाश्य है।

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रचनाकार परिचय:-
सुशील कुमार का जन्म 13 सितम्बर, 1964, को पटना सिटी में हुआ, किंतु पिछले तेईस वर्षों से आपका दुमका (झारखण्ड) में निवास है।

आपनें बी०ए०, बी०एड० (पटना विश्वविद्यालय) से करने के पश्चात पहले प्राइवेट ट्यूशन, फिर बैंक की नौकरी की| 1996 में आप लोकसेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर राज्य शिक्षा सेवा में आ गये तथा वर्तमान में संप्रति +२ जिला स्कूल चाईबासा में प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं।

आपकी अनेक कविताएँ-आलेख इत्यादि कई प्रमुख पत्रिकाओं, स्तरीय वेब पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं।

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रचनाकार परिचय:-

पेशे से चार्टड एकाउन्टेन्ट समीर लाल, जबलपुर (म.प्र.) के मूल निवासी हैं। वर्तमान में आप कनाडा में रह रहे हैं और वहीं के एक बैंक में तकनीकी सलाहकार के तौर पर कार्यरत हैं।

आप उड़न तश्तरी के नाम से चिट्ठे पर लिखते हैं जो कि २००७ में "तरकश स्वर्णकलम" विजेता एवं इंडी ब्लॉगिज द्वारा विश्व का सर्वाधिक लोकप्रिय चिट्ठा है।

इसी माह आपका नया काव्य संग्रह ’बिखरे मोती’ भी प्रकाशित हुआ है।

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मंगलेश डबराल

समकालीन कवियों में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले मंगलेश डबराल का जन्म 16 मई 1948 को काफलपानी गाँव, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड में हुआ। आपकी प्रमुख कृतियाँ हैं - पहाड़ पर लालटेन (1981); घर का रास्ता (1988); हम जो देखते हैं (1995)आदि। आपको अनेकों सम्मानों से नवाजा गया है जिनमें - ओमप्रकाश स्मृति सम्मान (1982); श्रीकान्त वर्मा पुरस्कार (1989) और " हम जो देखते हैं" के लिये साहित्य अकादमी पुरस्कार (2000) आदि प्रमुख हैं।
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रचनाकार परिचय:-

डा0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर का जन्म 19-03-1974 को उरई (जालौन) उ.प्र. में हुआ। आप को “डा0 वृन्दावनलाल वर्मा के उपन्यासों में अभिव्यक्त सौन्दर्य का अनुशीलन” विषय पर पी-एच0 डी0 प्राप्त है साथ ही आप अर्थशास्त्र, हिन्दी साहित्य एवं राजनीतिशास्त्र में स्नातकोत्तर हैं। आपनें पत्रकारिता एवं जनसंचार का स्नातकोत्तर डिप्लोमा भी किया है। आपकी दस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं साथ ही साथ आपके लेख, कहानी, लघुकथा, कविता, ग़ज़ल, नाटक आदि का नियमित रूप से देश की प्रतिष्ठित पत्र/पत्रिकाओं में प्रकाशन होता रहा है।

आपको अनेक सम्मान प्राप्त हैं जिनमें उत्तर प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा सम्मान(2004); साहित्यिक मंच, भोपाल से युवा आलोचक का सम्मान (2006); सेण्टर फार स्टडी आफ डेवलपिंग सोसायटीस (सीएसडीएस) नई दिल्ली की ओर से बेस्ट इन्वेस्टीगेटर(20060; अखिल भारतीय पुस्तक प्रचार समिति, इन्दौर द्वारा साहित्यिक सम्मान (2007); नेहरू युवा केन्द्र, जालौन स्थान उरई द्वारा सर्वश्रेष्ठ युवा का सम्मान (2007); पुष्पगंधा प्रकाशन कवर्धा (छत्तीसगढ़) द्वारा सम्पादक श्री की सम्मानोपाधि (2008).

वर्तमान में आप साहित्यिक पत्रिका स्पंदन का संपादन करने के साथ साथ गांधी महाविद्यालय, उरई (जालौन) में प्रवक्ता भी हैं।

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रचनाकार परिचय:-
आगरा में जन्मी डॉ. रोली तिवारी मिश्रा पत्रकारिता एवं हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर हैं। आपने “लोक रंगमंच" पर शोधकिया है। बचपन से आपका कविता लेखन के साथ-साथ कई सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुडाव रहा है। दैनिक जागरण में पत्रकार के तौर पर करियर की शुरुआत करने के बाद कुछ समय आकाशवाणी पर उदघोषिका रहीं। महाविद्यालय में पत्रकारिता विभाग में प्रवक्ता के तौर पर कुछ समय कार्य करने के बाद सैन्याधिकारी पति के साथ भारत के दूरदराज़ हिस्सों का सिंहावलोकन किया। स्वान्तः सुखाय लेखन भी साथ-साथ चलता रहा। वर्तमान में आप एक विद्यालय की प्रशासिका हैं।

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रचनाकार परिचय:-

गौरव शुक्ला कुछ समय पूर्व तक कवि और पाठक दोनों ही के रूप में अंतर्जाल पर बहुत सक्रिय रहे हैं।

अपनी सुंदर और भावपूर्ण कविताओं, गीतों और गज़लों के लिये पहचाने जाने वाले गौरव को अपने कुछ व्यक्तिगत कारणों से अंतर्जाल से दूर रहना पड़ा। साहित्य शिल्पी के माध्यम से एक बार फिर आपकी रचनायें अंतर्जाल पर आ रही हैं।

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रचनाकार परिचय:-

१९५६ में कोण्डागांव (बस्तर) में जन्मी श्रीमती शकुंतला तरार एक वरिष्ठ कवयित्री और स्वतंत्र पत्रकार हैं। "बस्तर का क्रांतिवीर- गुण्डाधुर", "बस्तर की लोककथायें" आदि कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकीं हैं। हल्बी भाषा में इनकी हाइकू रचनाओं का एक संग्रह भी प्रकाशित है।


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रचनाकार परिचय:-

जन्म इंदौर ,मध्यप्रदेश में हुआ. देवीअहिल्या विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक. लेखन में छात्र जीवन से ही रूचि थी.भारत और दुबई में रहने के बाद वर्त्तमान में अमेरिका के शर्लोट शहर में हैं. लेखन के साथ नृत्य , लोकल हिन्दुस्तानी रेडियो प्रोग्राम के साथ कई सांस्कृतिक कार्यकर्मों में पूरे परिवार के साथ सक्रिय हैं, अनेक रेडियो कार्यक्रम प्रसारित हो चुके हैं, जिनमें लेखन का भरपूर योगदान रहा है. पाक कला में निपुण है. ज्यादा वक्त लेखन और नृत्य में बिताना पसंद करती हैं.

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<span title=रचनाकार परिचय:-

२८ जुलाई, १९५९ को मंडला (म.प्र.) में जन्मे श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव "विनम्र" ने सिविल इंजीनियरिंग में रायपुर से स्नातक करने के बाद फाउंडेशन इंजीनियरिंग में भोपाल से स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की तथा इग्नू से सर्टिफाइड एनर्जी मैनेजर डिप्लोमा भी प्राप्त किया।

वरिष्ठ साहित्यकार प्रो.सी. बी. श्रीवास्तव विदग्ध तथा शिक्षाविद् श्रीमती दयावती श्रीवास्तव के सुपुत्र विवेक रंजन विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशित होते रहे हैं। आकाशवाणी व दूरदर्शन से इनकी कई रचनाओं का प्रसारण भी हुआ है।

इनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं: आक्रोश (कविता-संग्रह), रामभरोसे, कौआ कान ले गया (व्यंग्य-संग्रह), हिन्दोस्ताँ हमारा (नाटक-संग्रह) आदि। कान्हा अभयारण्य परिचायिका तथा एक अन्य कविता संग्रह प्रकाशनाधीन है।

विभिन्न पुरुस्कारों से सम्मानित श्री विवेक रंजन २००५ से हिन्दी ब्लागिंग से जुड़े हैं और अपना चिट्ठा "विवेक के व्यंग" चला रहे हैं।

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रचनाकार परिचय:-

श्रीमती सुधा भार्गव का जन्म ८ मार्च, १९४२ को अनूपशहर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। बी.ए., बी.टी., विद्याविनोदिनी, विशारद आदि उपाधियाँ प्राप्त सुधा जी का हिन्दी भाषा के अतिरिक्त अंग्रेजी, संस्कृत और बांग्ला पर भी अच्छा अधिकार है।

बिरला हाईस्कूल, कोलकाता में २२ वर्षों तक हिन्दी शिक्षक रह चुकीं सुधा जी की कई रचनायें विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। परिषद भारती, कविता सम्भव-१९९२, कलकत्ता-१९९६ आदि संग्रहों में भी आपकी रचनायें सग्रहित हैं। बाल कहानियों की आपकी तीन पुस्तकों "अंगूठा चूस", "अहंकारी राजा" व "जितनी चादर उतने पैर पसार" के अतिरिक्त "रोशनी की तलाश में" (२००२) नामक काव्य-संग्रह भी प्रकाशित है। कई लेखक संगठनों से जुड़ी सुधा भार्गव की रचनायें रेडियो से भी प्रसारित हो चुकीं हैं।

आप डा. कमला रत्नम सम्मान तथा प.बंगाल के "राष्ट्र निर्माता पुरुस्कार" से भी सम्मानित हो चुकी हैं।

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रचनाकार परिचय:-

11 मार्च 1959 को (बीकानेर, राजस्‍थान) में जन्मे मुकेश पोपली ने एम.कॉम., एम.ए. (हिंदी) और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्‍नातकोत्‍तर किया है और वर्तमान में भारतीय स्‍टेट बैंक, दिल्‍ली में राजभाषा अधिकारी के पद पर कार्यरत है|

अनेक पुरुस्कारों से सम्मानित मुकेश जी की रचनायें कई प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं| आपका एक कहानी संग्रह "कहीं ज़रा सा..." भी प्रकाशित है। आकाशवाणी, बीकानेर से भी आपकी कई रचनाओं का प्राय: प्रसारण होता रहा है।

आप अंतर्जाल पर भी सक्रिय हैं और अपना एक ब्लाग "स्वरांगन" चलाते हैं।

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परिचय:-

सालासर में ६ नवम्बर, १९७३ को जन्मे राजाभाई कौशिक अजमेर के डी.ए.वी. कालेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के उपरांत आयुर्वेद की ओर उन्मुख हुये और इस क्षेत्र में सुयश प्राप्त किया।

वर्तमान में राजस्थान के चुरू में निवास कर रहे राजाभाई ने अनेक कविताएं, लेख, व्यंग्य आदि लिखें हैं और कई सम्मान प्राप्त किये हैं। आप एक अच्छे चित्रकार भी हैं।

उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर में १९६५ को जन्मे अम्बरीष श्रीवास्तव ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर से शिक्षा प्राप्त की है।
आप राष्ट्रवादी विचारधारा के कवि हैं। कई प्रतिष्ठित स्थानीय व राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं व इन्टरनेट की स्थापित पत्रिकाओं में उनकी अनेक रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। वे देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित तकनीकी व्यवसायिक संस्थानों व तथा साहित्य संस्थाओं जैसे "हिंदी सभा", "हिंदी साहित्य परिषद्" आदि के सदस्य हैं। वर्तमान में वे सीतापुर में वास्तुशिल्प अभियंता के रूप में स्वतंत्र रूप से कार्यरत हैं तथा कई राष्ट्रीयकृत बैंकों व कंपनियों में मूल्यांकक के रूप में सूचीबद्ध होकर कार्य कर रहे हैं।
प्राप्त सम्मान व अवार्ड: "इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी अवार्ड २००७", "अभियंत्रणश्री" सम्मान २००७ तथा "सरस्वती रत्न" सम्मान २००९ आदि|


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साहित्य शिल्पी के कुछ प्रमुख रचनाकार

अजय कुमार अजय अक़्स
अखिलेश अजय यादव
अदिति मजुमदार डॉ॰ अंजना संधीर
अनवार आलम अनिल कान्त
डॉ. अनिल चड्डा अनिल पाराशर
अनिल पुसदकर अनुपमा चौहान
अब्दुल रहमान मन्सूर अभिषेक “कार्टूनिस्ट"
अभिषेक सागर अम्बरीष श्रीवास्तव
अमन दलाल अमित कुमार राणा
अमितोष मिश्रा डॉ० अरविन्द मिश्र
अलबेला खत्री अवनीश एस. तिवारी
अविनाश वाचस्पति प्रो. अश्विनी केशरवानी
डॉ. अ. कीर्तिवर्धन
डॉ० सुरेश तिवारी सुरेश शर्मा
संदीप कुमार सीमा सचदेव
संगीता पुरी सुमन बाजपेयी
संजीव सुशील कुमार
समीर लाल संजीव वर्मा "सलिल"
सुधा भार्गव डॉ० सुधा ओम ढींगरा
सत्यजीत भट्टाचार्य सुभाष नीरव
सतपाल ख्याल सुशील छोक्कर
सुनीता चोटिया सुषमा गर्ग
संजीव तिवारी सूरज प्रकाश
स.र. हरनोट सुदर्शन प्रियदर्शनी
सनत कुमार जैन सुमित सिंह
सुमन 'मीत' सुषमा झा
सुलभ 'सतरंगी' डॉ० सुभाष राय
डॉ० मोहम्मद साजिद खान संगीता मनराल
संजय जनांगल सरोज त्यागी

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